Trending pradarshan: सुबह साइन, दिनभर गायब! कॉलेज शिक्षक पर छात्रों का बड़ा आरोप, 2 घंटे धरना
राजकीय पीजी महाविद्यालय गंगापुर सिटी में शिक्षण व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर विद्यार्थियों का आक्रोश बुधवार को खुलकर सामने आया। राजनीति विज्ञान के सहायक आचार्य पर लगातार कॉलेज से गायब रहने, पढ़ाई प्रभावित करने और छात्राओं की स्कूटी योजना में बाधा डालने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए छात्र-छात्राओं ने अतिरिक्त जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इससे पहले विद्यार्थियों ने करीब दो घंटे तक एसडीएम कोर्ट परिसर में धरना-प्रदर्शन कर अपनी मांगों को मजबूती से रखा।
“सुबह साइन, फिर दिनभर गायब” – छात्रों का आरोप
छात्र नेता सीताराम गुर्जर ने आरोप लगाया कि राजकीय पीजी महाविद्यालय गंगापुर सिटी में राजनीति विज्ञान के सहायक आचार्य धर्मवीर मीना रोज़ाना सुबह कॉलेज आकर उपस्थिति दर्ज कर लेते हैं, लेकिन इसके बाद दिनभर कॉलेज से नदारद रहते हैं। न तो कक्षाएं नियमित लगती हैं और न ही विद्यार्थियों को पढ़ाया जाता है। छात्रों का कहना है कि स्कूटी योजना से जुड़े काम का बहाना बनाकर बार-बार कॉलेज से गायब रहने की शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
स्कूटी योजना में देरी से छात्राएं परेशान
विद्यार्थियों ने बताया कि शिक्षक की लापरवाही के कारण कॉलेज की कई छात्राओं को सरकार की स्कूटी योजना का लाभ समय पर नहीं मिल पा रहा है। फाइलें लंबित पड़ी हैं और बार-बार शिकायत के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ रहा। छात्राओं का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाली छात्राओं के लिए स्कूटी पढ़ाई जारी रखने का अहम साधन है, लेकिन अनावश्यक देरी से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है।
“झूठे बहाने, गलत माहौल”
छात्रों का आरोप है कि जब शिक्षक कॉलेज से दूर होते हैं तो कभी यह कहा जाता है कि वे स्कूटी के काम से बाहर गए हैं और कभी बीमारी का बहाना बनाया जाता है। इससे न सिर्फ शिक्षण व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि अन्य शिक्षकों पर भी इसका गलत असर पड़ रहा है। अनुशासनहीनता का माहौल बन रहा है और कॉलेज में पढ़ाई का स्तर लगातार गिरता जा रहा है।
छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि कॉलेज का सीसीटीवी सिस्टम जानबूझकर ठीक नहीं होने दिया जा रहा, ताकि शिक्षकों की अनुपस्थिति की सच्चाई सामने न आ सके। कभी भी आने-जाने की छूट से कॉलेज में नियंत्रण और जवाबदेही खत्म हो चुकी है।
दबाव और धमकियों के आरोप
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि संबंधित शिक्षक प्राचार्य और अन्य शिक्षकों पर दबाव बनाते हैं। एपीओ और निलंबन जैसी कार्रवाई करवाने की धमकियां दी जाती हैं। छात्रों का आरोप है कि इसी दबाव के कारण कॉलेज प्रशासन भी खुलकर कार्रवाई करने से बचता रहा है, जिससे समस्या लगातार बढ़ती चली गई।
एसडीएम कोर्ट में दो घंटे का धरना
अपनी मांगों को लेकर छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में एसडीएम कोर्ट परिसर पहुंचे, जहां करीब दो घंटे तक शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन किया गया। छात्रों ने नारेबाजी के बजाय ज्ञापन और तथ्यों के साथ अपनी बात रखने पर जोर दिया। प्रदर्शन के दौरान अनुशासन बनाए रखा गया, जिससे प्रशासन तक उनकी बात गंभीरता से पहुंचे।
अतिरिक्त जिला कलेक्टर का आश्वासन
अतिरिक्त जिला कलेक्टर सुदर्शन सिंह तोमर ने छात्रों की बात ध्यानपूर्वक सुनी और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी शिकायतों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि 1 जनवरी तक स्कूटी से जुड़ी सभी समस्याओं का समाधान कर दिया जाएगा और पात्र छात्राओं को स्कूटी का वितरण सुनिश्चित होगा। साथ ही, कॉलेज प्रशासन से रिपोर्ट लेकर आगे की कार्रवाई की बात भी कही।
प्रतिभाशाली छात्रों की पीड़ा
प्रदर्शन में शामिल छात्रा पूजा कुमारी गुर्जर और छात्र अंकुश ने बताया कि वे विश्वविद्यालय और जिला स्तर पर खेलों में भाग ले चुके हैं, गोल्ड मेडल तक जीत चुके हैं, लेकिन कॉलेज स्तर पर समय पर दस्तावेज और सहयोग न मिलने से उनका आगे बढ़ना प्रभावित हुआ है। उनका कहना है कि अगर कॉलेज में पढ़ाई और प्रशासनिक कामकाज सुचारु होता, तो कई छात्र-छात्राएं राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते थे।
बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं शामिल
धरना-प्रदर्शन और ज्ञापन सौंपने के दौरान सतेंद्र शर्मा, देवेंद्र, बीरम, काजल बैरवा, विनीता कुमारी बैरवा, विनोद सैनी, प्रेम, रिशु सैनी, गोलू सैनी, दिलखुश सैनी, भारती मीणा सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में कॉलेज में नियमित कक्षाएं, पारदर्शी प्रशासन और जिम्मेदार शिक्षण माहौल की मांग की।
संदेश: यह आंदोलन सिर्फ किसी एक शिक्षक के खिलाफ नहीं, बल्कि बेहतर शिक्षा व्यवस्था की मांग का प्रतीक बनकर उभरा है। छात्रों ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं, बल्कि कॉलेज में पढ़ाई का माहौल सुधारना, योजनाओं का समय पर लाभ दिलाना और जवाबदेही तय करना है।
विद्यार्थियों का कहना है कि अगर अब भी उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो वे आगे भी लोकतांत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
निष्कर्ष: राजकीय पीजी महाविद्यालय गंगापुर सिटी का यह मामला शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता की जरूरत को उजागर करता है। अतिरिक्त जिला कलेक्टर के आश्वासन के बाद अब सभी की निगाहें 1 जनवरी पर टिकी हैं। अगर तय समय में स्कूटी वितरण और जांच प्रक्रिया पूरी होती है, तो छात्रों का विश्वास प्रशासन पर मजबूत होगा।
