Naresh Meena Latest News: सत्ता में भागीदारी ही आदिवासी समाज की असली ताकत: नरेश मीणा

IMG 20260104 194249 663 Naresh Meena Latest News

Naresh Meena Latest News: नैनवां में प्रतिभा सम्मान एवं भामाशाह सम्मान समारोह में गरजे भगतसिंह सेना प्रमुख

नैनवां (बूंदी)। “सत्ता में भागीदारी के बिना आदिवासी समाज का भला संभव नहीं”—यह स्पष्ट और दो-टूक संदेश रविवार को नैनवां में आयोजित प्रतिभा सम्मान एवं भामाशाह सम्मान समारोह में सुनाई दिया। कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी मीणा सेवा संस्थान, नैनवां द्वारा किया गया, जिसमें भगतसिंह सेना के प्रमुख एवं किसान नेता नरेश मीणा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। आयोजकों ने पारंपरिक आत्मीयता के साथ उनका स्वागत एवं सम्मान किया।

लोकतंत्र में हिस्सेदारी ही शक्ति का आधार

सभा को संबोधित करते हुए नरेश मीणा ने कहा कि इतिहास में आदिवासी समाज को लंबे समय तक शिक्षा और ग्रंथों से वंचित रखा गया, बावजूद इसके हमारे पूर्वजों ने सूझबूझ, शौर्य और प्रशासनिक क्षमता के बल पर शासन किया। आज लोकतंत्र में प्रवेश के बाद भी यदि समाज सत्ता के केंद्र से दूर रहता है, तो उसका शोषण तय है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक चेतना और सत्ता में सीधी भागीदारी ही समाज को सुरक्षित और सशक्त बनाती है।

हाडोती में प्रतिनिधित्व की कमी पर सवाल

नरेश मीणा ने हाडोती क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि जनसंख्या में पर्याप्त हिस्सेदारी के बावजूद आदिवासी मीणा समाज को राजनीतिक रूप से हाशिये पर रखा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीमित जनाधार वाले पूंजीपति वर्ग के नेता—ओम बिरला, शांति धारीवाल, प्रमोद जैन भाया और प्रताप सिंह सिंघवी—वर्षों से हाडोती की राजनीति पर प्रभाव बनाए हुए हैं। उनके अनुसार, यह असंतुलन क्षेत्रीय विकास और सामाजिक न्याय—दोनों के रास्ते में बाधा है।

प्रतीकात्मक संकल्प: जूते-चप्पल का त्याग

सभा में नरेश मीणा ने अपने संकल्प को प्रतीकात्मक रूप में रखते हुए कहा कि उन्होंने हाडोती को पूंजीपतियों के राजनीतिक कब्जे से मुक्त कराने तक जूते-चप्पल का त्याग किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक ऐसे नेता विधानसभा और संसद से बाहर नहीं होंगे, तब तक वे यह संकल्प नहीं तोड़ेंगे। उनके इस बयान पर सभा में मौजूद लोगों ने जोरदार समर्थन जताया।

सत्ता से दूरी के दुष्परिणाम

नरेश मीणा ने कहा कि सत्ता से दूर रहने का नतीजा यह है कि आज हाडोती में समाज के अधिकारी-कर्मचारियों को प्रताड़ना झेलनी पड़ती है। भय के माहौल में नौकरी करना, व्यवसायों पर दबाव और सामाजिक असुरक्षा—ये सभी सत्ता-विहीनता के दुष्परिणाम हैं। उन्होंने आह्वान किया कि समाज संगठित होकर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में निर्णायक भूमिका निभाए।

भाजपा पर तीखा प्रहार, कांग्रेस पर भी सवाल

अपने वक्तव्य में नरेश मीणा ने बताया कि 8 महीने की जेल और 32 मुकदमों के बावजूद उन्होंने सार्वजनिक रूप से घोषणा की है कि वे मरते दम तक भाजपा में नहीं जाएंगे। उनका आरोप है कि भाजपा आरक्षण विरोधी रुख रखती है और दलित-आदिवासी हितों के खिलाफ काम करती है। उन्होंने अंता विधानसभा उपचुनाव में भाजपा का टिकट ठुकराने का भी उल्लेख किया।

IMG 20260104 194311 593 Naresh Meena Latest News

कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि वरिष्ठ आदिवासी नेताओं को अक्सर उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने पूर्व लोकसभा सांसद रामनारायण मीणा का नाम लिया, जिन्हें सामान्य लोकसभा सीट से सांसद होने के बावजूद मंत्री पद नहीं मिला। उन्होंने कहा कि राजस्थान में लगभग 13% आबादी होने के बाद भी आदिवासी समाज को टिकट के लिए संघर्ष करना पड़ता है।

2028 में हाडोती में “राजनीतिक क्रांति” का दावा

नरेश मीणा ने कहा कि वे पूरे राजस्थान में जनजागरण अभियान चलाकर समाज को राजनीतिक रूप से संगठित करेंगे और संख्या के अनुपात में हिस्सेदारी सुनिश्चित कराएंगे। उनके अनुसार, 2028 के विधानसभा चुनाव हाडोती के लिए निर्णायक साबित होंगे और क्षेत्र में राजनीतिक क्रांति तय है।

गुर्जर–मीणा भाईचारा और विभाजन की राजनीति

सभा में उन्होंने गुर्जर–मीणा भाईचारे की मजबूती पर जोर दिया और आरोप लगाया कि कुछ नेता जानबूझकर समाजों के बीच फूट डालते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयासों को लोकतांत्रिक तरीके से परास्त करना होगा। इस संदर्भ में उन्होंने अशोक चांदना पर भी आरोप लगाए और कहा कि अंता विधानसभा चुनाव में उन्हें हराने के लिए पूरी ताकत झोंकी गई। उनके अनुसार, समाज-विरोधी राजनीति करने वालों का राजनीतिक अस्तित्व समाप्त होना चाहिए।

आयोजकों के प्रति आभार, बड़ी संख्या में उपस्थिति

कार्यक्रम के अंत में नरेश मीणा ने आदिवासी मीणा सेवा संस्थान, नैनवां के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर पूर्व लोकसभा सांसद रामनारायण मीणा सहित हजारों की संख्या में आदिवासी मीणा समाज के लोग मौजूद रहे। समारोह में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों और भामाशाहों का सम्मान कर सामाजिक सहभागिता और प्रेरणा का संदेश दिया गया।

निष्कर्ष:

नैनवां का यह कार्यक्रम हाडोती ही नहीं, बल्कि पूरे राजस्थान में आदिवासी राजनीति की दिशा और दशा पर गंभीर विमर्श का मंच बना। नरेश मीणा का संदेश स्पष्ट रहा—सत्ता में हिस्सेदारी के बिना सामाजिक न्याय संभव नहीं, और लोकतांत्रिक लड़ाई संगठित होकर ही जीती जा सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

  Copyright © Rajasthan Tv News, All Rights Reserved.Design by 8770138269