Mahapanchayat Update: बडियाल कलाँ को पंचायत समिति बनाओ संघर्ष समिति का आंदोलन निर्णायक मोड़ पर
बडियाल कलाँ को पंचायत समिति बनाने की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन अब अपने सबसे अहम और निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। धरने के 31वें दिन आंदोलनकारियों का जोश, आक्रोश और एकजुटता साफ दिखाई दी। दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेसवे के नीचे महापड़ाव के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। संघर्ष समिति और क्षेत्र की 23 ग्राम पंचायतों से जुड़े हजारों लोगों ने एकमत होकर 27 दिसम्बर को एक्सप्रेस हाईवे के पास खटीक के तिबारे पर महापंचायत एवं महापड़ाव आयोजित करने की औपचारिक घोषणा कर दी है।
गांव–गांव से उठी एक आवाज
इस आंदोलन की खास बात यह है कि यह केवल एक गांव या एक पंचायत का मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि 23 ग्राम पंचायतों की सामूहिक लड़ाई बन चुका है। ग्रामीणों का कहना है
कि वर्षों से बडियाल कलाँ को पंचायत समिति बनाने की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार आश्वासन देकर बात टाल दी जाती है। इसी उपेक्षा के खिलाफ जनता अब सड़कों पर उतर आई है।
क्रमिक अनशन जारी, निलोज पंचायत की बड़ी भागीदारी
धरने के 31वें दिन निलोज ग्राम पंचायत के 21 लोग क्रमिक अनशन पर बैठे। अनशनकारियों का कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, प्रशासनिक सुविधा और जनता के अधिकारों के लिए है। अनशन पर बैठे लोगों में बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक की भागीदारी देखने को मिली, जिसने आंदोलन को और मजबूती दी।
गीतों के माध्यम से सरकार को चेतावनी
धरना स्थल पर माहौल तब और भावुक हो गया जब गायक कलाकार दिलराज चेची ने अपने गीतों के माध्यम से सरकार को चेतावनी दी। उनके गीतों में गांवों की पीड़ा, युवाओं का भविष्य और प्रशासनिक अनदेखी की झलक साफ दिखाई दी। गीतों के जरिए आंदोलनकारियों ने यह संदेश दिया कि यह लड़ाई केवल मांगों की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की है।
संघर्ष समिति का स्पष्ट संदेश
संघर्ष समिति के अध्यक्ष सियाराम रलावता ने कहा कि पिछले 30 दिनों से आंदोलन पूरी तरह गांधीवादी और शांतिपूर्ण तरीके से चलाया जा रहा है। अनशन, क्रमिक अनशन और शांतिपूर्ण धरनों के बावजूद सरकार ने अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने कहा कि जनता लंबे समय से धैर्य बनाए हुए थी, लेकिन अब जनभावनाएं उफान पर हैं। इसी के चलते 27 दिसम्बर को महापड़ाव और महापंचायत का फैसला लिया गया है।
“अब लड़ाई आर–पार की”
सैनी समाज तहसील अध्यक्ष ताराचंद सैनी ने दो टूक शब्दों में कहा कि अब यह लड़ाई आर–पार की होगी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस आंदोलन को हल्के में ले रही है, लेकिन जनता पीछे हटने वाली नहीं है। उन्होंने सभी समाजों और पंचायतों से एकजुट होकर आंदोलन को मजबूती देने की अपील की।
एकजुटता ही ताकत
संघर्ष समिति के सचिव गुलाब सिंह कुशवाह ने मंच से सभी स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नेताओं को महापंचायत में आने का खुला आमंत्रण दिया। उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति पूरी रणनीति के तहत काम कर रही है और जो नेता इस संघर्ष में साथ खड़े हैं, जनता उन्हें भविष्य में भी समर्थन देगी। वहीं जो लोग आंदोलन से दूरी बनाएंगे, उन्हें आने वाले समय में जनता के विरोध का सामना करना पड़ेगा।
युवाओं में दिखा आक्रोश
समय सिंह बासडा ने युवाओं से आह्वान किया कि अब समय आ गया है कमर कसकर तैयार होने का। उन्होंने कहा कि यह समय याचना का नहीं, बल्कि अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष का है। सरकार शांतिपूर्ण तरीके से मांगें नहीं मान रही है, इसलिए जनता को मजबूरी में कठोर कदमों पर विचार करना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया के जरिए आंदोलन को धार
संघर्ष समिति के सोशल मीडिया प्रभारी पवन भजाक ने कहा कि सरकार नोटिस और दबाव के जरिए आंदोलनकारियों को डराना चाहती है, लेकिन यह संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि 30 दिनों से धरने पर बैठे लोग अब और इंतजार नहीं करेंगे। यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं तो बड़ा आंदोलन, एक्सप्रेस हाईवे जाम और विधानसभा घेराव जैसे कदम उठाए जा सकते हैं।
महिलाओं की मजबूत भागीदारी
धरना स्थल पर महिलाओं की भारी उपस्थिति ने आंदोलन को नई ऊर्जा दी। महिलाओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाज़ी करते हुए कहा कि वे संघर्ष समिति के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। उनका कहना है कि पंचायत समिति बनने से क्षेत्र के विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासनिक सुविधाओं में सुधार होगा, जिसका सीधा लाभ महिलाओं और बच्चों को मिलेगा।
अनशनकारियों और गणमान्य लोगों की मौजूदगी
क्रमिक अनशन पर महेन्द्र सिंह तंवर, गिरधारी गुर्जर, जौहरी गुर्जर, जगदीश गुर्जर, बहादुर गुर्जर, रामेश्वर गुर्जर, सुमेर गुर्जर, बीरबल गुर्जर सहित कई लोग बैठे।
इसके अलावा धरना स्थल पर रामावतार सेठ, बडियाल कलाँ सरपंच छुठ्ठन लाल सैनी, झूपडीन सरपंच गुठ्ठल, सुरेन्द्र मीणा मोटुका, नवल किशोर, लल्लू राम सैनी, महेन्द्र सैनी बालाजी, डॉ. शंकर सैनी मोटुका, विजेंद्र सिंह मोटुका, रामकिशोर मंत्री, अंकित डेन्जर, गुलाब चंद महावार, प्रेमचंद सैनी (पररू), सुशील धांधोलाई, विजय राजाहेड़ा, रामकरण मिस्त्री सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
27 दिसम्बर पर टिकी निगाहें
कुल मिलाकर, बडियाल कलाँ को पंचायत समिति बनाने की मांग को लेकर चल रहा यह आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है। 27 दिसम्बर को होने वाली महापंचायत और महापड़ाव न केवल इस आंदोलन की दिशा तय करेगा, बल्कि सरकार और प्रशासन के लिए भी एक बड़ा संदेश होगा। क्षेत्र की जनता का साफ कहना है—अब यह लड़ाई हक और अधिकारों की है, और इसे अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लिया जाएगा।
