अलवर: नरेश मीणा का आह्वान, कैप्टन छुट्टन लाल मीणा को मिले हक़ का सम्मान

अलवर के कोठी नारायणपुर में नरेश मीणा का भव्य स्वागत, कैप्टन छुट्टन लाल मीणा स्मारक की मांग
अलवर के कोठी नारायणपुर में नरेश मीणा का भव्य स्वागत, कैप्टन छुट्टन लाल मीणा स्मारक की मांगअलवर: राजस्थान की सामाजिक-राजनीतिक चेतना में एक बार फिर इतिहास और सम्मान का प्रश्न केंद्र में आया है। सोमवार को अलवर जिले के कोठी नारायणपुर गांव में भगत सिंह सेना के प्रमुख एवं किसान नेता नरेश मीणा का ग्रामवासियों द्वारा भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, समाज के प्रबुद्धजन और युवा मौजूद रहे। पूरे गांव में उत्साह, एकजुटता और सामाजिक गौरव का वातावरण देखने को मिला। जन्मभूमि से जुड़ा सम्मान का सवाल सभा को संबोधित करते हुए नरेश मीणा ने कहा कि कोठी नारायणपुर गांव मीणा समाज के महान समाजसेवी, संघर्षशील और दूरदर्शी नायक कैप्टन छुट्टन लाल मीणा की जन्मभूमि है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि कैप्टन छुट्टन लाल मीणा के ऐतिहासिक संघर्ष और अद्वितीय योगदान के कारण ही राजस्थान के मीणा आदिवासी समाज को आरक्षण का संवैधानिक अधिकार प्राप्त हुआ। यह योगदान केवल किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं था, बल्कि पूरे समाज की दिशा और दशा बदलने वाला सिद्ध हुआ। आरक्षण के पीछे संघर्ष की कहानी नरेश मीणा ने कहा कि मीणा समाज मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र सहित देश के अनेक हिस्सों में निवास करता है, लेकिन आरक्षण का लाभ केवल राजस्थान के मीणा आदिवासी समाज को मिला। इसके पीछे दशकों का संघर्ष, संगठन और दूरदर्शिता रही—और इस ऐतिहासिक उपलब्धि का श्रेय कैप्टन छुट्टन लाल मीणा को जाता है। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के इस अध्याय को सही संदर्भ और सम्मान के साथ नई पीढ़ी तक पहुंचाना आज की आवश्यकता है। सम्मान में देरी, सवाल आज भी कायम सभा में नरेश मीणा ने यह भी कहा कि इतने बड़े सामाजिक योगदान के बावजूद आज तक कैप्टन छुट्टन लाल मीणा को वह सम्मान नहीं मिल पाया, जिसके वे वास्तविक हकदार हैं। उन्होंने इसे समाज और व्यवस्था दोनों के लिए आत्ममंथन का विषय बताया। नरेश मीणा ने जोर देकर कहा कि इतिहास को केवल पुस्तकों में नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्मृतियों और स्मारकों के माध्यम से जीवंत रखा जाना चाहिए। कोठी नारायणपुर में स्मारक की ज़ोरदार मांग कार्यक्रम में प्रमुख मांग यह रही कि कोठी नारायणपुर में कैप्टन छुट्टन लाल मीणा का भव्य स्मारक बनाया जाए। नरेश मीणा ने कहा कि यह स्मारक केवल एक संरचना नहीं होगा, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष, त्याग और सामाजिक चेतना का जीवंत प्रतीक बनेगा। इससे युवाओं को प्रेरणा मिलेगी और समाज के योगदान को स्थायी पहचान मिलेगी। हाईकोर्ट परिसर में भी स्मारक की अपील नरेश मीणा ने आदरणीय डॉ. किरोड़ी लाल मीणा से भी अपील की कि मीणा हाईकोर्ट परिसर में कैप्टन छुट्टन लाल मीणा का स्मारक स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि न्याय के परिसर में सामाजिक न्याय के नायक का स्मरण एक सशक्त संदेश देगा—कि संघर्ष और संवैधानिक अधिकार साथ-साथ चलते हैं। समाज की एकजुटता का संदेश इस अवसर पर उपस्थित ग्रामीणों और समाज के प्रतिनिधियों ने भी स्मारक निर्माण की मांग का समर्थन किया। वक्ताओं ने कहा कि यह पहल समाज को एकजुट करने, इतिहास को सम्मान देने और युवाओं को दिशा देने का कार्य करेगी। कार्यक्रम में महिला-पुरुष, युवा-वृद्ध सभी वर्गों की भागीदारी ने सामाजिक एकता का स्पष्ट संदेश दिया। जनसंवाद और प्रेरक विचार नरेश मीणा ने अपने संबोधन में कहा कि समाज के नायकों को भूलना, अपनी जड़ों से कटना है। उन्होंने शिक्षा, संगठन और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर बल देते हुए कहा कि जब समाज अपने इतिहास को पहचानता है, तभी वह भविष्य को सशक्त बनाता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इतिहास से प्रेरणा लेकर सामाजिक उत्थान में सक्रिय भूमिका निभाएं। कार्यक्रम का समापन और आभार कार्यक्रम के अंत में नरेश मीणा ने अपने स्वागत-सम्मान के लिए कोठी नारायणपुर गांव के समस्त ग्रामवासियों का आभार एवं धन्यवाद प्रकट किया। उन्होंने विश्वास जताया कि समाज की यह आवाज़ नीतिनिर्माताओं तक पहुंचेगी और कैप्टन छुट्टन लाल मीणा को उनका हक़ का सम्मान अवश्य मिलेगा। निष्कर्ष कोठी नारायणपुर में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक स्वागत समारोह नहीं, बल्कि इतिहास, सम्मान और सामाजिक न्याय की पुनर्स्थापना का आह्वान था। कैप्टन छुट्टन लाल मीणा के योगदान को स्मारक के माध्यम से स्थायी पहचान देने की मांग ने समाज में नई ऊर्जा भरी है। आने वाले समय में यह पहल न केवल मीणा समाज, बल्कि व्यापक सामाजिक चेतना के लिए भी प्रेरक सिद्ध हो सकती है। कार्यक्रम में महिलाओं और बुजुर्गों की भी उल्लेखनीय भागीदारी रही। उपस्थित लोगों ने कहा कि ऐसे सामाजिक आयोजनों से समाज की एकता मजबूत होती है और नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जुड़ने का अवसर मिलता है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर स्मारक निर्माण की मांग को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कार्यक्रम शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। आयोजन के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं देखी गई। ग्रामीणों और समाज के प्रतिनिधियों ने प्रशासन एवं जनप्रतिनिधियों से मांग की कि कैप्टन छुट्टन लाल मीणा के योगदान को सम्मान देने की दिशा में जल्द ठोस कदम उठाए जाएं। स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कार्यक्रम में अपने विचार रखते हुए कहा कि कैप्टन छुट्टन लाल मीणा का संघर्ष आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने कहा कि सामाजिक अधिकारों और आरक्षण की लड़ाई में उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। ऐसे महापुरुषों की स्मृति को सहेजना समाज की जिम्मेदारी है। वक्ताओं ने कहा कि यदि सरकार और प्रशासन द्वारा कोठी नारायणपुर में भव्य स्मारक का निर्माण किया जाता है, तो यह स्थान सामाजिक जागरूकता और प्रेरणा का केंद्र बनेगा। इससे आने वाली पीढ़ियां अपने इतिहास, संघर्ष और सामाजिक मूल्यों को समझ सकेंगी। ग्रामीणों ने कहा कि समाज के महापुरुषों के सम्मान से सामाजिक चेतना मजबूत होती है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस मांग को लेकर समाज एकजुट रहेगा और आने वाले समय में सरकार द्वारा सकारात्मक निर्णय लिया जाएगा।

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