Naresh Meena News: हजारों किसानों के साथ नरेश मीणा का छबड़ा में बड़ा आंदोलन, प्रशासन ने मानी प्रमुख मांगें
छबड़ा, 12 जून। राजस्थान के छबड़ा में किसान नेता नरेश मीणा के नेतृत्व में गुरुवार को किसानों का अभूतपूर्व जनसैलाब देखने को मिला। खाद की कमी, कालाबाजारी और किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर आयोजित इस विशाल आंदोलन में हजारों किसान छबड़ा एसडीएम कार्यालय पहुंचे। किसानों की भारी भीड़ और एकजुटता के आगे प्रशासन को वार्ता के लिए आगे आना पड़ा, जिसके बाद कई प्रमुख मांगों पर सहमति बनी।
दरअसल, किसान नेता नरेश मीणा ने एक दिन पहले सोशल मीडिया के माध्यम से वीडियो जारी कर किसानों से 12 जून को छबड़ा एसडीएम कार्यालय पहुंचने की अपील की थी। उनके आह्वान पर बड़ी संख्या में किसान निर्धारित समय से पहले ही मौके पर पहुंच गए। देखते ही देखते एसडीएम कार्यालय परिसर किसानों से भर गया और आंदोलन ने बड़ा रूप ले लिया। आंदोलन के बाद किसान प्रतिनिधिमंडल और प्रशासन के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक में छबड़ा एसडीएम, कृषि विभाग के अधिकारी, संबंधित विभागों के प्रतिनिधि तथा वृत्ताधिकारी (सीओ) मौजूद रहे। किसान नेताओं ने खाद संकट, कालाबाजारी, सहकारी समितियों पर पर्याप्त आपूर्ति और किसानों के लंबित मामलों को प्रमुखता से उठाया। किसानों ने मांग की कि खरीफ सीजन को देखते हुए पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जाए, खाद एवं कृषि आदानों की कालाबाजारी पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा सहकारी समितियों पर नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही किसानों के लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की भी मांग रखी गई। प्रशासन ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए कई मांगों पर सहमति व्यक्त की। अधिकारियों ने खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने, कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और संबंधित विभागों को नियमित निगरानी के निर्देश देने का भरोसा दिलाया। इसके अलावा किसानों की शिकायतों के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने पर भी सहमति बनी। किसान नेता नरेश मीणा ने कहा कि किसानों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए संघर्ष लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि प्रशासन द्वारा दिए गए आश्वासनों पर अमल नहीं हुआ तो किसानों को साथ लेकर इससे भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन में शामिल किसानों ने प्रशासन के सकारात्मक रुख का स्वागत किया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि अब उन्हें आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर कार्रवाई चाहिए। किसानों ने उम्मीद जताई कि जल्द ही खाद संकट और कालाबाजारी जैसी समस्याओं का समाधान होगा।