Election Process: राजस्थान में वोटर लिस्ट शुद्धिकरण पर सियासी घमासान: कांग्रेस का आरोप—SIR की आड़ में लोकतंत्र पर हमला
जयपुर, 15 जनवरी: राजस्थान में आगामी विधानसभा चुनाव में अभी लगभग तीन वर्ष का समय शेष है, इसके बावजूद राज्य में चल रही एसआईआर (Special Intensive Revision) प्रक्रिया को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया है कि आवश्यकता न होने के बावजूद एसआईआर करवाई जा रही है, जिसके कारण पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों के चुनावों में अनावश्यक देरी हुई है। इससे भी गंभीर आरोप यह है कि एसआईआर के बाद भी कथित रूप से अशुद्ध और फर्जी वोटर लिस्ट के आधार पर ही स्थानीय निकाय चुनाव कराने की तैयारी की जा रही है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने जयपुर स्थित प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में आयोजित एक विस्तृत प्रेसवार्ता में भाजपा पर लोकतंत्र को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने एसआईआर प्रक्रिया में पूरी सक्रियता और जिम्मेदारी के साथ भाग लिया। कांग्रेस के बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) ने जहां आवश्यकता पड़ी, वहां उपस्थित होकर कार्य किया और चुनाव आयोग के साथ हर स्तर पर संवाद और सहयोग किया। इसके बावजूद, जिस तरह से अंतिम चरण में वोटर लिस्ट से नाम काटने के लिए बल्क में आवेदन दिए जा रहे हैं, वह पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।
एसआईआर के अंतिम चरण में भाजपा पर गंभीर आरोप
डोटासरा ने आरोप लगाया कि एसआईआर में आपत्तियां दर्ज कराने की अंतिम तिथि से ठीक पहले भाजपा ने सुनियोजित तरीके से कार्रवाई शुरू की। उनके अनुसार, भाजपा के राजस्थान प्रभारी द्वारा संगठन की गुप्त बैठकें की गईं, जिनमें एसआईआर को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए गए। इसके बाद केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के जयपुर दौरे के दौरान लगभग चार घंटे तक चली बैठकों में भाजपा नेताओं को एसआईआर को लेकर रणनीतिक निर्देश दिए गए।
कांग्रेस का आरोप है कि इसके तुरंत बाद मुख्यमंत्री कार्यालय से हर विधानसभा क्षेत्र के लिए पेन ड्राइव में एक विशेष डेटा भाजपा नेताओं को उपलब्ध कराया गया। इसी डेटा के आधार पर हजारों की संख्या में पहले से प्रिंटेड फार्म तैयार कराए गए, जिन पर कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर हैं और कई मामलों में बीएलए के हस्ताक्षर तक नहीं हैं। इन फार्मों को एक केंद्रीकृत एजेंसी द्वारा तैयार करवाकर कांग्रेस समर्थित मतदाताओं के नाम काटने के लिए बल्क में जमा कराया गया।
नियमों की अनदेखी और तय सीमा से अधिक आवेदन
कांग्रेस अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि निर्वाचन नियमों के अनुसार एक बीएलए एक दिन में अधिकतम 50 आवेदन नाम काटने के लिए दे सकता है और ड्राफ्ट प्रकाशन के बाद यह सीमा घटकर 10 रह जाती है। इसके बावजूद, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के प्रकाशन से ठीक एक दिन पहले हजारों की संख्या में आवेदन एक साथ जमा कराए गए, जो स्पष्ट रूप से नियमों का उल्लंघन है।
उन्होंने 14 जनवरी 2026 तक जारी चुनाव आयोग के आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि भाजपा के 973 बीएलए ने मात्र 211 नाम जोड़ने के लिए और 5694 नाम हटाने के लिए आवेदन दिए, जबकि कांग्रेस के 110 बीएलए ने 185 नाम जोड़ने और केवल 2 नाम हटाने के लिए आपत्तियां दर्ज कराईं। इससे स्पष्ट होता है कि भाजपा का पूरा जोर नाम जोड़ने की बजाय नाम हटाने पर है।
कमजोर वर्गों के वोट बैंक को निशाना बनाने का आरोप
डोटासरा ने दावा किया कि भाजपा ने विशेष रूप से उन विधानसभा क्षेत्रों को निशाना बनाया है जहां कांग्रेस कम मतों से जीती थी, जहां दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या अधिक है या जहां भाजपा खुद कम अंतर से जीती थी। आरोप है कि इन क्षेत्रों में कांग्रेस समर्थित वोटरों के नाम बड़ी संख्या में काटने के लिए सुनियोजित प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने कुछ निजी कंपनियों को डेटा जुटाने का ठेका दिया है, ताकि ऐसे मतदाताओं की पहचान की जा सके जो भाजपा की नीतियों के विरोध में रहे हैं—चाहे वे कर्मचारी आंदोलन से जुड़े हों, युवा मित्र जैसे कार्यक्रमों से संबंधित हों या पर्यावरण संरक्षण आंदोलनों में सक्रिय हों।
अधिकारियों पर दबाव और सत्ता के दुरुपयोग का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश के कई विधानसभा क्षेत्रों में एक ही दिन में 2000 से 4000 प्रिंटेड फार्म जमा कराए गए। इन फार्मों में न तो सही जानकारी है और न ही आवश्यक शपथ-पत्र (अंडरटेकिंग) पर हस्ताक्षर। इसके बावजूद, बीएलओ और अन्य चुनाव अधिकारियों पर इन फार्मों को स्वीकार करने का दबाव बनाया जा रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जिला कलेक्टर और चुनाव अधिकारी भाजपा के दबाव में आकर नियमों के विरुद्ध वोटरों के नाम काटते हैं, तो कांग्रेस कार्यकर्ता चुप नहीं बैठेंगे और व्यापक विरोध दर्ज कराया जाएगा। डोटासरा ने कहा कि यह पूरा मामला इलेक्टोरल मैनुअल, मतदाता पंजीकरण नियम 23बी और संबंधित पैरा का खुला उल्लंघन है।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का बड़ा खुलासा
प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने अपने विधानसभा क्षेत्र का उदाहरण देते हुए बताया कि पहले जहां 4000 फार्म नाम काटने के लिए आए थे, वहीं अचानक यह संख्या बढ़कर 12000 हो गई। उन्होंने कहा कि अधिकांश फार्मों पर न तो मतदाता की पूरी जानकारी है और न ही सही हस्ताक्षर।
जूली ने मांग की कि निर्वाचन अधिकारी कार्यालयों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इतनी बड़ी संख्या में फार्म किसने और किस नियम के तहत जमा कराए। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नियमों में एक व्यक्ति द्वारा सैकड़ों या हजारों फार्म जमा करने की अनुमति है, तो उसका स्पष्ट उल्लेख किया जाए।
फर्जी हस्ताक्षर और कानूनी कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि एक ही व्यक्ति द्वारा 500 से 700 तक आवेदन एक साथ दिए गए, जो स्पष्ट रूप से गैरकानूनी है। प्रशासन से मांग की गई कि ऐसे मामलों में तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। उनका कहना है कि यदि सत्ताधारी दल इसी तरह चुनाव प्रक्रिया में हस्तक्षेप करता रहेगा, तो चुनाव कराने का औचित्य ही समाप्त हो जाएगा।
लोकतंत्र और संविधान पर हमला: कांग्रेस का निष्कर्ष
प्रेसवार्ता के अंत में कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर द्वारा दिए गए मताधिकार पर सीधा हमला है। सत्ता का दुरुपयोग कर चुनिंदा वर्गों के वोट काटना लोकतंत्र को कमजोर करने का प्रयास है। कांग्रेस ने सभी जिलाध्यक्षों, बीएलए, विधायकों और प्रत्याशियों को निर्देश दिए हैं कि वे एसडीओ कार्यालयों में जाकर नियम विरुद्ध आए आवेदनों की सूची मांगें और जब तक पारदर्शिता नहीं होती, तब तक विरोध जारी रखें।
अंत में, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त से मिलकर ज्ञापन सौंपा और निष्पक्ष, पारदर्शी तथा नियमों के अनुरूप एसआईआर प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की।
