Bandikui News: बड़ियाल कलां पंचायत समिति आंदोलन 12वां दिन: सद्बुद्धि यज्ञ में उठी जनता की आवाज, 23 पंचायतों ने तेज किया संघर्ष
बांदीकुई (दौसा): बड़ियाल कलां को पंचायत समिति का दर्जा देने की मांग अब निर्णायक रूप लेती जा रही है। बांदीकुई विधानसभा क्षेत्र की 23 ग्राम पंचायतों को महुआ विधानसभा क्षेत्र की बैजूपाड़ा पंचायत समिति में शामिल किए जाने के विरोध में उप तहसील कार्यालय बड़ियाल कलां के बाहर चल रहा धरना सोमवार को 12वें दिन भी जारी रहा।
सद्बुद्धि यज्ञ के माध्यम से सरकार को जगाने का प्रयास, धरना स्थल पर आज आंदोलनकारियों ने सद्बुद्धि यज्ञ का आयोजन कर सरकार को जगाने की प्रार्थना की।सैकड़ों ग्रामीणों—महिला-पुरुषों—ने आहुति अर्पित कर मांग दोहराई कि बड़ियाल कलां को पंचायत समिति बनाया जाए और 23 ग्राम पंचायतों को पुनः बांदीकुई में जोड़ा जाए, ग्रामीणों का कहना है कि सभी पंचायतें भूगोल, जनसांख्यिकी, सुविधाओं और आवागमन के आधार पर बांदीकुई क्षेत्र से ही प्राकृतिक रूप से जुड़ी हैं, इसलिए पुनर्स्थापन न्यायसंगत है
6 दिसंबर से ग्राम पंचायतवार क्रमिक अनशन
संघर्ष को और तेज करते हुए संघर्ष समिति ने 6 दिसंबर से क्रमिक अनशन शुरू करने की घोषणा की है। तय कार्यक्रम इस प्रकार है—
6 दिसंबर : रलावता
7 दिसंबर : धांधोलाई
8 दिसंबर : बड़ियाल कलां
9 दिसंबर : मुंडघिस्या
10 दिसंबर : झूंपड़ीन
11 दिसंबर : अन्ततवाड़ा
12 दिसंबर : सोडाला बासड़ा
13 दिसंबर : मोटुका
14 दिसंबर : गोलाडा
इन गांवों से बड़ी संख्या में लोगों ने अनशन हेतु स्वेच्छा से नाम दर्ज कराए, जो आंदोलन की बढ़ती एकजुटता को दर्शाता है लोककथाओं और जनगीतों के जरिए सरकार को चेतावनी दिनभर मंच पर ग्रामीणों ने लोककथाओं, जनगीतों और नारों के माध्यम से सरकार को संदेश दिया कि
“जनता की अनदेखी अब और बर्दाश्त नहीं।”
आंदोलनकारियों ने कहा कि मांग पूरी होने तक धरना और विरोध कार्यक्रम लगातार जारी रहेंगे। सैकड़ों लोगों की उपस्थिति, जन एकजुटता का बड़ा प्रदर्शन
सद्बुद्धि यज्ञ व धरने में स्थानीय नेतृत्व और सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। मुख्य रूप से उपस्थित रहे—
समय सिंह बासड़ा, संतोष कटारिया, संघर्ष समिति अध्यक्ष सियाराम रलावता, ताराचंद सैनी, चतर सिंह बासड़ा (PCC), एडवोकेट सुमेर सिंह रलावता (पूर्व अध्यक्ष, भाजपा मंडल बांदीकुई), छुट्टनलाल सैनी (सरपंच बड़ियाल कलां), हुकुम सिंह चाड़का, गुलाब सिंह कुशवाह, हरिप्रताप सैनी (सरपंच गोलाडा), सुरेन्द्र मीणा (मोटुका), रामप्रताप सैनी (गोलाडा), भंवर सिंह मेडी, मनीष सैनी, भजनलाल सैनी, मिथुन परेवा (उप सरपंच), गोपाल खटीक, गौरव प्रजापत, मुकेश धांधोलाई, रमेश सैनी (पूर्व सरपंच), गिर्राज प्रसाद शर्मा, बनवारी भगत, अमरसिंह रलावता, विष्णु शर्मा, निहाल सिंह सोनाडी, गुलाब चंद प्रजापत सहित भारी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
सभास्थल पर एक ही स्वर गूंजता रहा—
“जब तक न्याय नहीं… तब तक आंदोलन जारी रहेगा।”
