Vidya Sambal Yojana: विद्या संबल योजना पर बड़ा संकट: 5 साल सेवा… अब बाहर का रास्ता? विद्या संबल आचार्यों पर नई संविदा भर्ती का वार !

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Vidya Sambal Yojana: 5 साल सेवा के बाद बाहर होंगे सहायक आचार्य? नई 5 वर्षीय संविदा भर्ती से प्रदेश में असंतोष

जयपुर/राजस्थान: प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है। वर्ष 2021 में शिक्षकों की कमी दूर करने के उद्देश्य से शुरू की गई विद्या संबल योजना अब सातवीं बार बंद होने की कगार पर है। राज्य सरकार आगामी सत्र 2026-27 से 5 वर्ष की अस्थाई संविदा भर्ती लागू करने की तैयारी में है। इस प्रस्ताव ने पिछले 5 वर्षों से कार्यरत विद्या संबल सहायक आचार्यों के भविष्य पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। संघ ने इसे “शोषण के बाद बाहर करने की नीति” बताया है।

🔎 योजना की पृष्ठभूमि: वर्ष 2021 में उच्च शिक्षा विभाग ने कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए विद्या संबल योजना लागू की। चयन प्रक्रिया यूजीसी एक्ट 2018 की टेबल 3B के अनुरूप एपीआई स्कोर व मेरिट के आधार पर की गई। जिला स्तर पर नोडल कॉलेज द्वारा विज्ञापन जारी कर गेस्ट फैकल्टी के रूप में सहायक आचार्य नियुक्त किए गए। इनकी नियुक्ति यूजीसी मानकों के अनुरूप थी, इसलिए शुरुआत में इसे उच्च शिक्षा के लिए “संजीवनी” माना गया।

📊 बार-बार बंद, फिर चालू — अस्थिरता का सिलसिला: योजना 2021 से अब तक 6 बार बंद और पुनः प्रारंभ हो चुकी है।

📌 फैक्ट फाइल: 2021 – प्रारंभ, 30 अप्रैल 2022 – बंद, अगस्त 2022 – पुनः प्रारंभ,फरवरी 2023 – बंद, अगस्त 2023 – पुनः प्रारंभ, फरवरी 2024 – बंद, मार्च 2024 – पुनः प्रारंभ, जून 2024 – बंद, जुलाई 2024 – पुनः प्रारंभ, दिसंबर-जनवरी 2025 – बंद, मार्च 2025 – पुनः प्रारंभ, जून 2025 – छठी बार बंद, जुलाई 2025 – सातवीं बार प्रारंभ, 30 जून 2026 – पुनः बंद करने की तैयारी, लगातार बंद-चालू की प्रक्रिया से शिक्षकों में असुरक्षा और विद्यार्थियों में अस्थिरता बनी रही।

🏛️ 373 सोसायटी कॉलेजों का संचालन

प्रदेश में 374 नए महाविद्यालय खोले गए हैं और 373 राजकीय महाविद्यालय सोसायटी मोड पर संचालित हो रहे हैं। ये कॉलेज राजस्थान कॉलेज एजुकेशन सोसायटी (राजसेस) के अधीन संचालित हैं। इनमें से अधिकांश कॉलेजों में एक भी स्थाई फैकल्टी नहीं है। नियमित कक्षाओं से लेकर परीक्षा, प्रशासनिक कार्य, सांस्कृतिक गतिविधियां — सब कुछ विद्या संबल सहायक आचार्य ही संभाल रहे हैं। हाल ही में राजकीय कन्या महाविद्यालय भीम को बंद किया गया, जिससे अस्थिरता का संदेश और गहरा हुआ।

⚖️ नई 5 वर्षीय संविदा भर्ती – क्या है प्रस्ताव?

राज्य सरकार अगस्त 2025 में कैबिनेट से पास प्रस्ताव के अनुसार 2026-27 सत्र से नई संविदा भर्ती लागू करेगी।

प्रस्ताव की मुख्य बातें: पदनाम: सहायक आचार्य की जगह “टीचिंग एसोसिएट”, वेतन: ₹28,800 मासिक, चयन: लिखित परीक्षा, 75 अंक – सामान्य ज्ञान, 300 अंक – संबंधित विषय स्थाई शिक्षकों पर 1 जनवरी 2026 से आठवां वेतन लागू, संघ का कहना है कि समान कार्य के लिए असमान वेतन और पदनाम शैक्षणिक गुणवत्ता को प्रभावित करेगा।

पक्षपात के आरोप: राज्य सरकार ने अधिग्रहित 10 निजी महाविद्यालयों के स्टॉफ को 19 नवंबर 2025 को स्क्रीनिंग के माध्यम से संविदा रूल 2023 का लाभ देकर 5 वर्ष की सेवा सुनिश्चितता प्रदान की।

यूजीसी मेरिट से चयन, फिर भी बेरोजगारी की मार! विद्या संबल योजना पर बड़ा फैसला

जबकि यूजीसी मेरिट के आधार पर चयनित विद्या संबल सहायक आचार्यों को यह लाभ नहीं दिया गया। संघ का आरोप है कि यह दोहरा मापदंड है।

💰 वेतन की गंभीर समस्या: कई-कई महीनों तक वेतन नहीं मिलता, 2-3 महीने देरी सामान्य, कई बार 6 महीने बाद भुगतान, केवल कालांश आधारित भुगतान, इसके बावजूद शिक्षकों ने नियमित कक्षाएं संचालित कीं।

🗣️ संघ पदाधिकारियों के बयान

डॉ. रवीन्द्र सिंह यादव, प्रदेशाध्यक्ष, विद्या संबल सहायक आचार्य संघ: “हमारा चयन यूजीसी एक्ट 2018 के तहत मेरिट से हुआ है। सरकार निजी कॉलेज स्टॉफ को स्क्रीनिंग से लाभ देती है, पर हमें नजरअंदाज करती है — यह न्यायसंगत नहीं।”

डॉ. उपदेश शर्मा, प्रदेश महामंत्री: “हमने अपने युवा जीवन के 5 वर्ष दिए। अब अधिकांश साथी ओवरएज हो गए हैं। हमें हटाना दुर्भाग्यपूर्ण होगा।

🏛️ अन्य राज्यों की स्थिति

हरियाणा सरकार ने नवंबर 2024 में विस्तार प्राध्यापक एवं अतिथि प्राध्यापक को सेवा सुनिश्चितता विधेयक से सुरक्षा दी। मध्यप्रदेश में भी सेवा सुनिश्चितता हेतु उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है।

📌 प्रमुख मांगें: हरियाणा की तर्ज पर रोजगार गारंटी, वर्तमान कार्यरत आचार्यों का स्क्रीनिंग से समायोजन, मासिक वेतन का नियमित भुगतान, यूजीसी वेतनमान लागू, ट्रांसफर/डेपुटेशन से प्रभावित न किया जाए, आयुक्तालय स्तर से आदेश जारी हों, यूजीसी पदनाम बरकरार रहे

🎯 बड़ा सवाल: क्या सरकार 5 वर्ष सेवा दे चुके शिक्षकों को प्राथमिकता देगी?, क्या नई संविदा भर्ती से हजारों परिवार प्रभावित होंगे?, क्या उच्च शिक्षा की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा?, प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था इस समय नीतिगत मोड़ पर खड़ी है। आने वाले महीनों में सरकार का निर्णय हजारों शिक्षकों और लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को तय करेगा।

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