हजारों श्रद्धालुओं ने मंगलवार को पांडुपोल हनुमान जी के किये दर्शन और मांगी मन्नत

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दो नए शावक मिलने से जिले व जिले के सरिस्का अभ्यारण क्षेत्र में छाई खुशी की लहर, जंगल में हुआ मंगल

हजारों श्रद्धालुओं ने मंगलवार को पांडुपोल हनुमान जी के किये दर्शन और मांगी मन्नत

Alwar: अलवर जिले में करीब एक वर्ष के इंतजार के बाद आखिर मंगलवार सुबह सरिस्का टाइगर रिजर्व (sariska tiger reserve) के लिए खुशखबर आई। सरिस्का (sariska)  में एसटी 14 के दो नए शावक दिखाई दिए। अलवर सरिस्का (alwar sariska) में अब बाघों का कुनबा बढ़कर 27 पहुंच गया है। इसमें 13 बाघिन,08 बाघ और 06शावक है। सरिस्का के डीएफओ डीपी जागावत ने बताया कि सरिस्का के अकबरपुर रेंज के अधीन डॉबली,सुकोला वन क्षेत्र में बाघिन एसटी-14 के मूवमेंट क्षेत्र में 27 फरवरी को कैमरा ट्रैप का अवलोकन करने पर दो नवजात शावक दिखाई दिए।इन शावकों की उम्र करीब दो माह बताया। बाघिन एवं दोनों शावकों का मूवमेंट सामान्य पाया गया है। बाघिन एसटी-14 एवं दोनों नवजात शावकों की मॉनिटरिंग के लिए वन कर्मियों की टीम बनाकर दिन रात निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। सरिस्का में दो नए शावक आने से वन्यजीव प्रेमियों एवं वन कर्मियों में खुशी का माहौल है। नए शावकों से सरिस्का के आबाद होने से चहूं और खुशी है वन्यजीव प्रेमियों का कहना है कि सरिस्का को भविष्य की जरुरत को देखते हुए नए टाइगरों की जरूरत है और नए शावकों के जन्म से यह जरूरत पूरी होने की उम्मीद है। सरिस्का में बाघिन एसटी-14 के दो नए शावक दिखने से अब बाघों का कुनबा बढ़कर 27 हो गया है। पहले सरिस्का में बाघों का कुनबा 25 था। सरिस्का में करीब एक वर्ष बाद दो नए शावक मिले हैं। हालांकि अभी दो बाघिन का रणथंबोर से सरिस्का में पुनर्वास होना है। सरिस्का प्रशासन की योजना वर्ष 2023-24 में बाघों की संख्या बढा़कर 30 से 35 तक करनी है। डीएफओ ने बताया कि बाघिन एसटी-14 पहले भी सरिस्का में शावकों को जन्म दे चुकी है।इसी बाघिन ने नवंबर-दिसंबर 2022 में तीन शावकों को जन्म दिया था। करीब सवा साल बाद दो शावकों को जन्म देकर सरिस्का टाइगर रिजर्व को आबाद किया है। डीएफओ ने बताया कि सरिस्का में बसे गांवों के विस्थापन के लिए गति पकड़ने से मानवीय दखल कम होने लगी है। इसका सुखद परिणाम यह रहा कि हर साल सरिस्का में नए शावक जन्म ले रहे हैं। गत दो सालों में ग्राम डाबली का पूरी तरह विस्थापन कराया तथा आधे सुकोला गांव का विस्थापन हो चुका है। गांवों के खाली होने से बाघिन को मानवीय दखल रहित क्षेत्र मिला और बाघिन एसटी-14 ने इसी क्षेत्र में पुनः दो शावकों को जन्म देकर अपनी स्थाई एवं सुरक्षित टैरिटरी साबित की है। इस बाघिन ने करीब सवा दो साल पहले भी यहां तीन शावकों को जन्म दिया था। अब ये तीनों शावक पूर्ण व्यस्क होकर सरिस्का टाइगर रिजर्व को आबाद कर रहे हैं। *वहीं मंगलवार के दिन* सुबह से पांडूपोल हनुमान मंदिर (pandupol hanuman mandir) पर हजारों श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहा। वन विभाग के कर्मचारी अपनी ड्यूटी बखूबी निभा रहे थे। कई जगह जाम की स्थिति पैदा हो गई थी, वन विभाग के कर्मचारियों ने अपनी तत्परता दिखाते हुए जाम लगने की नौबत नहीं आने दी। सफाई कर्मचारी भी समय समय पर सफाई का विशेष ध्यान रखें हुए थे । हरियाणा, गुजरात, पंजाब, महाराष्ट्र, राजस्थान सहित दर्जनों राज्यो से श्रद्धालु भक्तों ने आकर हनुमान जी महाराज के मंदिर में डंडोती लगाकर ढो़क देकर अपनी व अपने परिवार और वतन की कुशलता की कामना कर मन्नत मांगी,दूर-दूर से लोग स्वामणी लेकर आए। लोगों ने भजन कीर्तन गाकर व परिक्रमा देकर प्रसाद चढ़ाया। और उसके बाद फाग महोत्सव का एक दूसरे के गुलाल का तिलक लगाकर फाग उत्सव का त्यौहार भी मनाया। इस अवसर पर महंत पंडित बाबूलाल शर्मा,पंडित मुरारीलाल शर्मा,पंडित चेतन शर्मा,पंडित अमन शर्मा,पंडित ललित मोहन शर्मा, पटवारी मोतीलाल शर्मा एडवोकेट राकेश शर्मा, कालूराम शर्मा, शिवदयाल,प्रहलाद दिनेश, केदार प्रसाद,शुभम शर्मा अनीता शर्मा, नागपाल शर्मा सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु भक्त उपस्थित थे।

रिपोर्ट: नागपाल शर्मा

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