New Gram Panchayat update: बड़ियाल कलां आंदोलन में बड़ा मोड़ — अनशनकारी अस्पताल में भर्ती, विधायक भागचंद टाकड़ा पहुंचे हॉस्पिटल; धरना स्थल पर उमड़ा जनसैलाब 🔥
बड़ियाल कलां। पंचायत समिति का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चल रहा बड़ियाल कलां का जनसंघर्ष शनिवार को बेहद संवेदनशील और निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया। लगातार चौथे दिन भूख हड़ताल पर बैठे अनशनकारी संतोष कटारिया की तबीयत अचानक गंभीर हो गई, जिसके बाद धरना स्थल पर अफरा-तफरी और तनाव का माहौल बन गया। लगातार चार दिन से अन्न–जल त्यागे संतोष की नाड़ी और BP तेजी से गिरते हुए पाए गए, जिसके बाद सरकारी 108 एम्बुलेंस उन्हें बांदीकुई अस्पताल लेकर पहुंची।
धरना स्थल पर इस घटनाक्रम के बीच SDM, SHO, BCMHO, RTS सहित प्रशासन का पूरा अमला मौके पर मौजूद रहा तथा अनशनकारियों को अस्पताल जाने, अनशन समाप्त करने और भीड़ नियंत्रित रखने के लिए समझाइश देता रहा। लेकिन संघर्ष समिति का रुख बिल्कुल स्पष्ट रहा— “लिखित निर्णय आए बिना अनशन नहीं टूटेगा।”
इस बीच अस्पताल में माहौल और अधिक गंभीर हो गया जब
स्थानीय विधायक भाई साहब भागचंद टाकड़ा स्वयं अस्पताल पहुंचे और संतोष कटारिया की स्थिति की जानकारी ली।
विधायक के पहुंचते ही अस्पताल परिसर में गतिविधि तेज हुई, ग्रामीणों में उम्मीद और चर्चा दोनों बढ़ गए कि अब आंदोलन की दिशा में बड़ा निर्णय संभव है।
अस्पताल में एक अनशनकारी भर्ती होने के बाद भी धरना स्थल पर जोश कम नहीं पड़ा। यहाँ दूसरे अनशनकारी समय सिंह बासड़ा सैकड़ों ग्रामीणों के साथ सीना तानकर डटे हुए हैं। बासड़ा ने साफ ऐलान किया— “मेरी जान भी चली जाए तो भी पीछे नहीं हटूंगा। जनता की उम्मीदों का संघर्ष अंतिम सांस तक जारी रहेगा।”
धरना स्थल पर लगातार भीड़ उमड़ रही है। सिया रामलालता, पवन भजाक, गुलाब सिंह कुशवाह, भंवर सिंह चौहान सहित बड़े-बुजुर्गों और युवाओं की भारी मौजूदगी ने आंदोलन को और मजबूती दी है। भीड़ बढ़ते देख पुलिस ने सुरक्षा और कड़ी कर दी है, वहीं तहसीलदार भी मौके पर बनी स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
संघर्ष समिति ने दो टूक चेतावनी दी है— “पंचायत समिति का दर्जा देने का लिखित आदेश आने तक न धरना रुकेगा, न भूख हड़ताल टूटेगी।”
बड़ियाल कलां का यह आंदोलन अब बेहद निर्णायक मोड़ पर है। एक अनशनकारी अस्पताल में जिंदगी से लड़ रहा है, दूसरा मौत को ललकारते हुए डटा है, और जनता लहर बनकर आंदोलन स्थल पर उमड़ रही है। आने वाले कुछ घंटे तय करेंगे— संघर्ष का समाधान होगा या आंदोलन का नया विस्फोट!
