Bandikui Update: बडियाल कलाँ पंचायत समिति संघर्ष: 36वें दिन प्रशासन पर गंभीर लापरवाही के आरोप, अनशनकारी का स्वास्थ्य परीक्षण तक नहीं
बांदीकुई: बडियाल कलाँ को पंचायत समिति बनाए जाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन आज 36वें दिन में प्रवेश कर गया। इस दौरान प्रशासन की कथित लापरवाही सामने आई है। संघर्ष समिति का आरोप है कि पिछले 3 दिनों से अनशन पर बैठे अनशनकारी समय सिंह बासड़ा का अब तक कोई स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराया गया, जिससे आमजन में भारी आक्रोश है।
संघर्ष समिति के अनुसार, 27 दिसंबर को आयोजित महापंचायत में, प्रशासन की मौजूदगी में ही कैथी मंच से समय सिंह बासड़ा ने अनशन की घोषणा की थी। इससे पहले भी वे 27 नवंबर से 3 दिसंबर तक सात दिवसीय अनशन कर चुके हैं, जिसे प्रशासन के आश्वासन और संघर्ष समिति व आमजन की समझाइश के बाद समाप्त किया गया था। हालांकि, एक माह बीतने के बाद भी मांगें पूरी नहीं होने पर पुनः अनशन शुरू किया गया।
धरने को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन
धरना स्थल पर दिनभर भारी भीड़ देखी गई। संघर्ष समिति के निर्णयानुसार सभी ग्राम पंचायतों से 21-21 लोग सामूहिक कार्मिक अनशन में शामिल रहे। लगातार बढ़ते जनसमर्थन ने आंदोलन को और मजबूती दी है।
नेताओं के बयान
संघर्ष समिति अध्यक्ष सियाराम रलावता ने कहा कि प्रशासन ने 3 दिन का समय मांगा था, जो कल पूरा हो जाएगा। यदि मांगें नहीं मानी गईं तो समिति प्लान-B पर काम करेगी।
सैनी समाज तहसील अध्यक्ष तारा चन्द सैनी ने चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं हुईं तो आगे की रणनीति पर ठोस निर्णय लिया जाएगा। किसी भी जनहानि की जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी।
संघर्ष समिति सचिव गुलाब सिंह कुशवाह ने आंदोलनकारियों से समिति के निर्देशों के अनुसार अनुशासित तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की।
मीडिया प्रभारी पवन भंजाक ने कहा कि अनशनकारी की देखरेख न होना गंभीर विषय है, जिससे जनता में गुस्सा बढ़ रहा है। मांगें नहीं मानी गईं तो लड़ाई आर-पार की होगी।
अनशनकारी ने फिलहाल बयान से किया इनकार
क्रांतिकारी समय सिंह बासड़ा से बातचीत का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फिलहाल किसी भी प्रकार का बयान देने से इनकार कर दिया।
धरना स्थल पर रहे कई गणमान्य लोग उपस्थित
इस दौरान संतोष कटारिया, गुठल गुर्जर, मिठ्ठू राम सेवलया, रामावतार सेठ, सरपंच छुठ्ठन लाल सैनी, सुरेन्द्र मीणा, विजेन्द्र सैनी, डॉ. शंकर सैनी, डॉ. मनीष सैनी सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण मौजूद रहे।
निष्कर्ष:
बडियाल कलाँ को पंचायत समिति बनाने की मांग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। प्रशासन की अगली कार्रवाई पर पूरे क्षेत्र की नजरें टिकी हैं।
