Bandikui Latest News: बडियाल कलाँ को पंचायत समिति बनाओ आंदोलन: 35वें दिन भी जनसमर्थन चरम पर, तीन दिन का अल्टीमेटम
बडियाल कलाँ। बडियाल कलाँ को पंचायत समिति बनाए जाने की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन 35वें दिन भी पूरी मजबूती और अनुशासन के साथ जारी रहा। बडियाल कलाँ को पंचायत समिति बनाओ संघर्ष समिति के आह्वान पर धरना स्थल पर दिनभर भारी जनसमर्थन देखने को मिला। आसपास के गांवों सहित दूर-दराज़ से लोग आंदोलन के समर्थन में पहुंचे, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह संघर्ष अब केवल एक क्षेत्रीय मांग नहीं, बल्कि व्यापक जनआंदोलन का रूप ले चुका है।
धरने के 35वें दिन आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला संगठन के गुढ़ा चन्द्रजी 36 एसए के अध्यक्ष सूबेदार समय सिंह अपनी पूरी टीम के साथ धरना स्थल पर पहुंचे। उन्होंने संघर्ष समिति को पूर्ण समर्थन देते हुए कहा कि जिस दिन संघर्ष समिति आह्वान करेगी, उस दिन गुढ़ा चन्द्रजी 36 एसए से सर्व समाज भारी संख्या में बडियाल कलाँ पहुंचकर आंदोलन को निर्णायक मजबूती प्रदान करेगा। उनके इस बयान से धरना स्थल पर मौजूद लोगों में नया उत्साह और ऊर्जा देखने को मिली।
सामूहिक कार्मिक अनशन और जनसैलाब
संघर्ष समिति के निर्णयानुसार सभी ग्राम पंचायतों की ओर से 21-21 लोगों ने सामूहिक कार्मिक अनशन रखा। यह अनशन शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक तरीके से किया गया। धरना स्थल पर पूरे दिन लोगों का भारी जमावड़ा लगा रहा। महिलाएं, बुज़ुर्ग, युवा और किसान—हर वर्ग के लोग आंदोलन में सक्रिय सहभागिता निभाते दिखाई दिए। इससे यह संदेश स्पष्ट गया कि पंचायत समिति की मांग जनभावनाओं से जुड़ी हुई है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।
प्रशासन को तीन दिन का समय
संघर्ष समिति के अध्यक्ष सियाराम रलावता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रशासन की ओर से तीन दिन का समय दिया गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि जनसमर्थन और लोकतांत्रिक दबाव के चलते सरकार और प्रशासन जल्द ही सकारात्मक निर्णय लेंगे। उनका कहना था कि आंदोलन को सर्व समाज का भरपूर समर्थन मिल रहा है और समिति पूरी जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ रही है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
सैनी समाज तहसील अध्यक्ष तारा चन्द सैनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संघर्ष समिति पूरी मजबूती के साथ अपनी मांग सरकार के सामने रख रही है। यदि तीन दिन में मांग पूरी नहीं होती है, तो जनता उग्र आंदोलन के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की जनहानि की जिम्मेदारी सरकार और प्रशासन की होगी। यह बयान प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है।
रणनीति और अनुशासन पर ज़ोर
संघर्ष समिति के सचिव गुलाब सिंह कुशवाह ने सभी आंदोलनकारियों से अपील की कि वे संघर्ष समिति के निर्देशों का पालन करें। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई पूरी रणनीति, संयम और मजबूती के साथ लड़ी जा रही है और किसी भी प्रकार की अव्यवस्था से बचना जरूरी है। समिति का उद्देश्य शांतिपूर्ण तरीके से अपनी जायज़ मांग को हासिल करना है।
आंदोलन बना बड़ा जनआंदोलन
क्रांतिकारी समय सिंह बासडा ने कहा कि आंदोलन को जिस प्रकार का जनसमर्थन मिल रहा है, वह ऐतिहासिक है। दूर-दूर से लोग धरना स्थल पर पहुंचकर समर्थन दे रहे हैं। उन्होंने कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला संगठन की टीम का आभार जताते हुए कहा कि उनके समर्थन से आंदोलन को नई दिशा और ताकत मिली है। अब यह संघर्ष केवल मांग नहीं, बल्कि जनता की आवाज़ बन चुका है।
आर-पार की लड़ाई का संकेत
मीडिया प्रभारी पवन भंजाक ने कहा कि सरकार के पास अब केवल तीन दिन का समय है। यदि इस अवधि में मांग नहीं मानी जाती है, तो फिर संघर्ष आर-पार की लड़ाई में तब्दील होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन पूरी तरह लोकतांत्रिक रहेगा, लेकिन जनभावनाओं की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अनशनकारियों और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों की भूमिका
इस दौरान क्रमिक अनशन पर संतोष कटारिया, पंचायत समिति सदस्य हुकम सिंह चाड़का, रामावतार सेठ, बडियाल कलाँ सरपंच छुठ्ठन लाल सैनी, सुरेन्द्र मीणा मोटुका, भजन लाल नेता, नवल किशोर, लल्लू राम सैनी, भवर सिंह मैडी, महेन्द्र सैनी बालाजी, डॉ. शंकर सैनी मोटुका, मुकेश माल आभानेरी, विजेंद्र सिंह मोटुका, रामकिशोर मंत्री, अंकित डेन्जर, गुलाब चंद महावार, प्रेमचंद सैनी (पररू), सुशील धांधोलाई, धारा सिंह रलावता, सुनील मुकेरिया, रामकरण मिस्त्री, धारासिंह नूरपुर सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इन सभी की मौजूदगी ने आंदोलन को सामाजिक और नैतिक समर्थन प्रदान किया।
निष्कर्ष
बडियाल कलाँ को पंचायत समिति बनाने की मांग अब निर्णायक मोड़ पर है। 35वें दिन का यह जनसमर्थन और विभिन्न संगठनों की भागीदारी इस बात का संकेत है कि यदि समय रहते निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है। आने वाले तीन दिन सरकार और प्रशासन के लिए बेहद अहम साबित होंगे। जनता की निगाहें अब फैसले पर टिकी हैं—या तो मांग मानी जाएगी, या फिर यह संघर्ष एक बड़े जनआंदोलन के रूप में नई दिशा लेगा।
