Badiyal Kalan Mahapanchayat: बड़ियाल कला को पंचायत समिति बनाने की मांग तेज, प्रशासनिक रोक के बावजूद महापड़ाव का ऐलान
बड़ियाल कला को पंचायत समिति का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर चल रहा जनआंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। बड़ियाल कला को पंचायत समिति बनाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में बीते कई दिनों से शांतिपूर्ण धरना, क्रमिक अनशन और जनजागरण के माध्यम से आंदोलन आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी क्रम में प्रशासनिक अधिकारियों के धरना स्थल पर पहुंचने के बाद महापड़ाव को अनुमति नहीं दिए जाने की जानकारी सामने आई, लेकिन इसके बावजूद संघर्ष समिति ने साफ शब्दों में ऐलान किया है कि कल 27 दिसंबर को बड़ियाल धरना स्थल पर भारी संख्या में लोग जुटेंगे और महापंचायत आयोजित की जाएगी।
प्रशासनिक रोक के बाद भी आंदोलन पर अडिग संघर्ष समिति
धरना स्थल पर पहुंचे प्रशासनिक अधिकारियों ने महापड़ाव की अनुमति नहीं होने की बात कही, लेकिन संघर्ष समिति ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया। समिति का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण, जनहितकारी और संविधान के दायरे में है। प्रशासन की इस कार्रवाई से क्षेत्र की जनता में आक्रोश और अधिक बढ़ गया है।
संघर्ष समिति अध्यक्ष सियाराम रलावता ने स्पष्ट किया कि महापंचायत में आमजन की सहमति से बड़ा और कड़ा फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह केवल किसी एक गांव या समाज की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के विकास और प्रशासनिक सुविधा से जुड़ी मांग है। जब तक बड़ियाल कला को पंचायत समिति का दर्जा नहीं मिलता, तब तक आंदोलन से पीछे हटने का सवाल ही पैदा नहीं होता।
“यह जनता की लड़ाई है, पीछे हटने का सवाल नहीं”
संघर्ष समिति अध्यक्ष सियाराम रलावता ने जनता से आह्वान किया कि अधिक से अधिक संख्या में धरना स्थल पर पहुंचकर इस ऐतिहासिक लड़ाई में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उनका कहना है कि पंचायत समिति बनने से क्षेत्र के दर्जनों गांवों को प्रशासनिक सुविधा, विकास योजनाओं की बेहतर पहुंच और रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि लंबे समय से क्षेत्र की जनता इस मांग को उठा रही है, लेकिन अब तक सरकार और प्रशासन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसी अनदेखी के चलते जनता को सड़कों पर उतरना पड़ा है।
सरकार पर आंदोलन दबाने के आरोप
सैनी समाज तहसील अध्यक्ष तारा चंद सैनी ने सरकार पर आंदोलन को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशासनिक रोक लगाकर जनता की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जनता में भारी आक्रोश है और यदि सरकार ने समय रहते मांग नहीं मानी तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
तारा चंद सैनी ने दो टूक शब्दों में कहा, “हम पीछे नहीं हटेंगे। हमारी मांग पूरी करवाकर ही दम लेंगे। यह लड़ाई हक और अधिकार की है।”
रणनीति के तहत आगे बढ़ रहा आंदोलन
संघर्ष समिति सचिव गुलाब सिंह कुशवाह ने बताया कि समिति पूरी रणनीति के तहत आंदोलन को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि हर निर्णय आमजन के हित में और उनकी सहमति से लिया जाएगा। समिति का उद्देश्य किसी तरह की अराजकता नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग को मनवाना है।
उनका कहना है कि महापंचायत में जो भी फैसला होगा, वह जनभावनाओं के अनुरूप और सर्वमान्य होगा। संघर्ष समिति किसी भी कीमत पर हार मानने को तैयार नहीं है।
“जनभावनाओं के अनुरूप होगा फैसला”
क्रांतिकारी नेता समय सिंह बासड़ा ने कहा कि 27 दिसंबर को होने वाली महापंचायत में उपस्थित जनसमूह की भावनाओं के अनुरूप संघर्ष समिति निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक बड़ियाल कला को पंचायत समिति का दर्जा नहीं मिल जाता।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल आज का नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। इसलिए जनता पूरी ताकत के साथ मैदान में डटी रहेगी।
21 लोग सामूहिक रूप से कार्मिक अनशन पर
आज आंदोलन के तहत 21 लोग सामूहिक रूप से कार्मिक अनशन पर रहे। अनशनकारियों का कहना है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से सरकार और प्रशासन का ध्यान अपनी जायज मांग की ओर आकर्षित करना चाहते हैं। धरना स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिलाएं और युवा मौजूद रहे, जिससे आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन मिलता दिखाई दे रहा है।
पंचायत समिति की मांग क्यों है अहम?
स्थानीय लोगों का कहना है कि बड़ियाल कला क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति, जनसंख्या और आसपास के गांवों की संख्या को देखते हुए पंचायत समिति का दर्जा बेहद जरूरी है। वर्तमान व्यवस्था में ग्रामीणों को छोटे-छोटे प्रशासनिक कामों के लिए दूर जाना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
पंचायत समिति बनने से विकास योजनाओं की निगरानी बेहतर होगी, सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे आमजन तक पहुंचेगा और क्षेत्र का समग्र विकास संभव हो सकेगा।
कल की महापंचायत पर सबकी नजर
अब सभी की निगाहें 27 दिसंबर की महापंचायत पर टिकी हैं। प्रशासनिक अनुमति न मिलने के बावजूद संघर्ष समिति का यह ऐलान बताता है कि आंदोलन अब पीछे हटने वाला नहीं है। यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो यह आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है।
संघर्ष समिति और क्षेत्र की जनता ने साफ कर दिया है कि यह लड़ाई अधिकार, विकास और सम्मान की है, और जब तक मांग पूरी नहीं होती, संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।
