सरिस्का राष्ट्रीय बाघ अभयारण्य इको सेंसेटिव जोन में उड़ रही है धज्जियां

google.com, pub-1662099916142516, DIRECT, f08c47fec0942fa0अलवर: टहला कस्बे के ग्राम पंचायत खोह में कालवाड़ गांव के किसान खेत के नजदीक धमाकेदार तीव्र गति से खनन पत्थरो की ब्लास्टिंग की जा रही है जिससे आसपास के नागरिक एवं पशुपालन किसान वर्ग का अस्त-व्यस्त होना चिंतित भय बना हुआ है। इस घटनाक्रम से दुखद होकर ग्रामीण लोग जिला कलेक्टर कार्यालय अलवर को ज्ञापन पत्र देकर शीघ्र रोकथाम की मांग की है। सेकडो ग्रामीणो सहित उपसरपंच रेखा द्वारा हस्ताक्षर सुधा ज्ञापन में बताया गया कि राजस्व गांव कालवाड़ के खसरा नंबर 187,395,189,185 की परिधि क्षेत्र में खातेदारी भूमि, सिवायचक भूमि,बांध बहाव क्षेत्र में खनन निति का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है। तानाशाही खनन मालिकों के इशारे में अवैध ब्लास्टिंग के खतरे पर ग्रामीण अपनी सुरक्षा की बात करते हैं तो धमकीयां दी जाती है । यह खनन लीजधारक जगमोहन राधाकिशन मार्बल के नामित है । जहां एक ओर सरिस्का राष्ट्रीय अभ्यारण्य ईको सेंसिटिव जोन सुप्रीम कोर्ट के आदेश एवं नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल न्यायालय के आदेश का उल्लंघन की निगरानी पर वन विभाग,खनन विभाग और जिला प्रशासन नजर अंदाज हो रहा है। ग्रामीण की ओर बताया गया कि अवैध रूप से खनन दोहन भू गहराई के कारण पेयजल स्त्रोत के नलकूप, सिंचाई के लिए पानी भी गहराई में चला गया है। खनन मालिकों द्वारा करीब दो सो फुट गहरी खुदाई करते खनन से ओर गहराई के पानी का बहाव अवैध रूप से बाहर किया जा रहा है । खनन विस्फोटक पदार्थ से अवैध ब्लास्टिंग प्रकिया से आसपास के मकान घरों में पत्थर के टुकड़े की तेज गति से गिरना जीवन को खतरा हो रहा है। खनन आसपास क्षेत्र में मानव जीवन पशुऔ के स्वास्थ्य पर विपरीत असर हो रहा है रात दिन धूल मिट्टी के कण हवा में उड़ रहे हैं। इन सभी समस्या से ग्रसित ग्रामीण में आक्रोश की भावना व्याप्त हो रही है ग्रामीणो ने इस परिधि क्षेत्र में खनन रोकथाम की अपील की है जिसे लेकर प्रशासनिक विभाग द्वारा अनदेखी की जारी है।   रिपोर्टर: अशोक कुमार मीना
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