Health News Rajasthan: राजस्थान में फार्मासिस्ट के 10032 नए पद सृजन की मांग तेज, खैरथल–तिजारा में सौंपा गया ज्ञापन

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Health News Rajasthan: राजस्थान में फार्मासिस्ट के 10032 नए पद सृजन की मांग तेज, खैरथल–तिजारा में सौंपा गया ज्ञापन

खैरथल–तिजारा। राजस्थान में निशुल्क दवा योजना को और अधिक मजबूत बनाने तथा आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में राजस्थान फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ (एकीकृत) ने एक बार फिर सरकार का ध्यान फार्मासिस्टों की भारी कमी की ओर आकर्षित किया है। इसी क्रम में संघ की जिला शाखा खैरथल–तिजारा ने जिलाध्यक्ष धीरज यादव के नेतृत्व में फार्मासिस्ट के 10032 नए पदों के सृजन की मांग को लेकर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संघ प्रतिनिधिमंडल ने यह ज्ञापन शिवपाल जाट, अतिरिक्त जिला कलेक्टर, एवं डॉ. अरविंद गेट, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को सौंपते हुए कहा कि राज्य की महत्वाकांक्षी निशुल्क दवा योजना तभी सफल हो सकती है, जब प्रत्येक दवा वितरण केंद्र पर प्रशिक्षित फार्मासिस्ट की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। जिले और प्रदेश में फार्मासिस्टों की गंभीर कमी संघ अध्यक्ष धीरज यादव ने बताया कि खैरथल–तिजारा जिले सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों में अनेक दवा वितरण केंद्र ऐसे हैं, जहां फार्मासिस्ट की स्थायी तैनाती नहीं है। इन केंद्रों पर या तो अन्य कार्मिकों से काम लिया जा रहा है या फिर केंद्र आंशिक रूप से संचालित हो रहे हैं, जिससे मरीजों को दवाइयों के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधीन प्रदेशभर में— पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) यूपीएचसी (शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) सेटेलाइट हॉस्पिटल उप जिला चिकित्सालय जिला चिकित्सालय टीबी हॉस्पिटल के माध्यम से लगभग 4000 सब-स्टोर और 4500 दवा वितरण केंद्र, यानी कुल मिलाकर करीब 8500 दवा वितरण इकाइयां संचालित हो रही हैं। इनमें से लगभग 4000 केंद्र ऐसे हैं, जहां फार्मासिस्ट का पद रिक्त है या कभी सृजित ही नहीं किया गया। निशुल्क दवा योजना पर पड़ रहा सीधा असर संघ का कहना है कि फार्मासिस्टों की कमी का सीधा असर राज्य सरकार की निशुल्क दवा योजना पर पड़ रहा है। इस योजना के तहत प्रतिदिन लाखों मरीज सरकारी चिकित्सा संस्थानों से दवाइयां प्राप्त करते हैं। लेकिन जब दवा वितरण केंद्रों पर पर्याप्त फार्मासिस्ट नहीं होते, तो— मरीजों को लंबी कतारों में खड़ा रहना पड़ता है दवा वितरण में अनावश्यक देरी होती है गलत दवा या गलत डोज देने की आशंका बढ़ जाती है बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और गंभीर रोगी सबसे अधिक प्रभावित होते हैं संघ ने स्पष्ट किया कि फार्मासिस्ट केवल दवा देने का कार्य नहीं करता, बल्कि वह दवा की सही खुराक, सेवन की विधि, संभावित दुष्प्रभाव और दवाओं के आपसी प्रभाव (ड्रग इंटरैक्शन) की जानकारी भी मरीज को देता है, जो गुणवत्तापूर्ण इलाज का अहम हिस्सा है। NQAS गाइडलाइन का हवाला ज्ञापन में NQAS (नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स) का विशेष रूप से उल्लेख किया गया। संघ के अनुसार NQAS की गाइडलाइन में दवा वितरण केंद्रों पर— वेटिंग टाइम (Waiting Time) टर्नअराउंड टाइम (Turnaround Time) को कम से कम रखने पर जोर दिया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि मरीज को कम समय में दवा मिलनी चाहिए। लेकिन जब एक फार्मासिस्ट पर जरूरत से ज्यादा दवा वितरण केंद्रों का बोझ डाल दिया जाता है या केंद्र बिना फार्मासिस्ट के चलते हैं, तो इन मानकों का पालन करना संभव ही नहीं रह जाता। संघ का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में अपने अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को NQAS प्रमाणन दिलाना चाहती है, तो फार्मासिस्टों के पदों का सृजन और त्वरित भर्ती अनिवार्य है। 10032 पदों की मांग क्यों? फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ ने 10032 नए पदों की मांग को तर्कसंगत बताते हुए कहा कि— प्रदेश में मौजूदा दवा वितरण केंद्रों की संख्या के अनुसार वर्तमान स्वीकृत पद बेहद कम हैं। कई नए चिकित्सा संस्थान और उप-स्वास्थ्य केंद्र खुल चुके हैं, जहां फार्मासिस्ट के पद सृजित ही नहीं किए गए। भविष्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को देखते हुए अतिरिक्त पदों की आवश्यकता और बढ़ेगी। संघ का दावा है कि यदि 10032 नए पद सृजित कर दिए जाते हैं, तो प्रदेश के हर दवा वितरण केंद्र पर कम से कम एक फार्मासिस्ट की तैनाती सुनिश्चित की जा सकती है। स्थायी नियुक्ति तक संविदा व्यवस्था की मांग संघ ने सरकार से यह भी मांग की कि जब तक स्थायी भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक संविदा आधार पर फार्मासिस्टों की नियुक्ति की जाए। इससे— दवा वितरण केंद्रों का संचालन सुचारु रहेगा बेरोजगार फार्मेसी युवाओं को अस्थायी रोजगार मिलेगा मरीजों को तत्काल राहत मिलेगी संघ पदाधिकारियों ने कहा कि राजस्थान में बड़ी संख्या में डिप्लोमा और डिग्रीधारी फार्मासिस्ट बेरोजगार हैं, जिन्हें अवसर दिया जाना चाहिए। प्रशासन को सौंपा गया ज्ञापन, सकारात्मक आश्वासन ज्ञापन सौंपने के दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर शिवपाल जाट और सीएमएचओ डॉ. अरविंद गेट को फार्मासिस्टों की समस्याओं से विस्तार से अवगत कराया गया। संघ प्रतिनिधियों के अनुसार अधिकारियों ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए इसे उच्च स्तर पर भिजवाने और यथासंभव समाधान का आश्वासन दिया है। बड़ी संख्या में पदाधिकारी रहे मौजूद इस अवसर पर संघ के कई पदाधिकारी और सदस्य उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से— रोहित खंडेलवाल करण कौशिक रणजीत सिंह राहुल शर्मा आदित्य यादव हिमांशी भूटानी शामिल थे। सभी ने एक स्वर में कहा कि यदि सरकार ने समय रहते फार्मासिस्टों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो भविष्य में आंदोलन का रास्ता अपनाया जा सकता है। स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ हैं फार्मासिस्ट विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी स्वास्थ्य व्यवस्था में डॉक्टर के साथ-साथ फार्मासिस्ट की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है। दवाओं की उपलब्धता, गुणवत्ता और सही वितरण के बिना बेहतर इलाज की कल्पना नहीं की जा सकती। राजस्थान फार्मासिस्ट कर्मचारी संघ का यह आंदोलन न केवल कर्मचारियों के हित से जुड़ा है, बल्कि राज्य की आम जनता के स्वास्थ्य अधिकार से भी सीधा संबंध रखता है। अब देखना यह है कि राज्य सरकार इस मांग पर कब और क्या निर्णय लेती है। (यह समाचार जनहित से जुड़ा है और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर केंद्रित है।)

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