Shaheed Smarak Jaipur: शहीद स्मारक पर विशेष शिक्षकों का एकदिवसीय धरना, सरकार से वर्षों से लंबित मांगों के शीघ्र समाधान की मांग
राजधानी जयपुर स्थित शहीद स्मारक शुक्रवार को विशेष शिक्षकों की आवाज़ का केंद्र बन गया, जब सर्व शिक्षा अभियान विशेष शिक्षक संघ (भामस) के बैनर तले राज्यभर से आए विशेष शिक्षकों ने एकदिवसीय धरना प्रदर्शन किया। इस धरने का उद्देश्य सरकार का ध्यान उन मांगों की ओर आकर्षित करना था, जो वर्षों से लंबित हैं और जिनके समाधान के अभाव में विशेष शिक्षक आर्थिक, मानसिक और सामाजिक दबाव झेलने को मजबूर हैं। धरने में शामिल शिक्षकों ने हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और एक स्वर में अपनी मांगों को जल्द से जल्द पूरा करने की अपील की। संघ का कहना था कि विशेष शिक्षक समाज के सबसे संवेदनशील वर्ग—विशेष आवश्यकता वाले बच्चों—की शिक्षा और विकास में अहम भूमिका निभाते हैं, इसके बावजूद उन्हें आज भी बुनियादी सेवा लाभों से वंचित रखा गया है। प्लेसमेंट एजेंसी प्रथा पर सवाल धरने की प्रमुख मांगों में प्लेसमेंट एजेंसी प्रथा को समाप्त करने की मांग सबसे आगे रही। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्तमान में विशेष शिक्षकों की नियुक्ति प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से की जा रही है, जिससे शिक्षकों को न तो नौकरी की सुरक्षा मिलती है और न ही नियमित कर्मचारियों जैसे सेवा लाभ। संघ ने स्पष्ट रूप से मांग की कि सभी विशेष शिक्षकों को सीधे संविदा पर नियुक्त किया जाए, ताकि शोषण की इस व्यवस्था का अंत हो सके। संघ का आरोप है कि प्लेसमेंट एजेंसी प्रथा के कारण शिक्षकों के मानदेय में कटौती, समय पर भुगतान न होना और सेवा शर्तों में मनमानी आम बात हो गई है। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल गिरता है, बल्कि विशेष बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर भी नकारात्मक असर पड़ता है। एक ही विभाग में भेदभाव का आरोप धरने में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया कि एक ही विभाग में अलग-अलग आदेश जारी कर विशेष शिक्षकों के बीच भेदभाव किया गया है। संघ ने कहा कि समान पदों पर कार्यरत शिक्षकों को अलग-अलग नियमों और शर्तों के तहत रखा गया है, जो पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है। संघ की मांग है कि विभागीय स्तर पर जारी सभी भेदभावपूर्ण आदेशों को निरस्त कर समान कार्य के लिए समान वेतन और समान सेवा लाभ सुनिश्चित किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना की मांग विशेष शिक्षकों ने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश (रिट संख्या 132/2016, दिनांक 7 मार्च 2025) की पूर्ण पालना सुनिश्चित करने की मांग भी की। संघ का कहना है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद राज्य स्तर पर अब तक पूरी तरह से अमल नहीं किया गया है। धरने में वक्ताओं ने कहा कि जब देश की सर्वोच्च अदालत ने विशेष शिक्षकों के पक्ष में आदेश दिया है, तो उसका सम्मान करते हुए राज्य सरकार को तुरंत सभी आवश्यक कदम उठाने चाहिए। ग्रीष्मकालीन अवकाश मानदेय और बजट राशि का मुद्दा धरने में यह मांग भी उठाई गई कि विशेष शिक्षकों को ग्रीष्मकालीन अवकाश का मानदेय दिया जाए। संघ का कहना है कि नियमित शिक्षकों को जहां अवकाश अवधि का पूरा वेतन मिलता है, वहीं विशेष शिक्षकों को इससे वंचित रखा जाता है, जो सरासर भेदभाव है। इसके साथ ही MHRD द्वारा जारी बजट (42166) की राशि समय पर उपलब्ध कराने की मांग भी प्रमुख रही। संघ ने आरोप लगाया कि बजट स्वीकृत होने के बावजूद उसकी राशि जमीनी स्तर तक नहीं पहुंच रही है, जिससे शिक्षकों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। PF/EPF लागू करने की मांग विशेष शिक्षकों ने धरने के माध्यम से सभी शिक्षकों का PF/EPF काटकर उसे लागू करने की मांग की। संघ का कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद विशेष शिक्षकों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से वंचित रखा गया है। धरने में मौजूद शिक्षकों ने कहा कि भविष्य की सुरक्षा हर कर्मचारी का अधिकार है और इसे किसी भी हाल में नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए। विभाग को तीन भागों में बांटने पर रोष धरने में यह मुद्दा भी उठाया गया कि एक ही विभाग को तीन भागों में बांट दिया गया है, जिससे सेवा शर्तों और लाभों में भारी असमानता पैदा हो गई है। संघ ने कहा कि समान पदों पर कार्यरत शिक्षकों को अलग-अलग लाभ देना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि संविधान की समानता की भावना के भी खिलाफ है। संघ ने सरकार से मांग की कि सभी विशेष शिक्षकों को समान सेवा लाभ दिए जाएं और विभागीय विभाजन से उत्पन्न असमानता को खत्म किया जाए। मानदेय वृद्धि पर सरकार से जवाब तलब धरने में विशेष शिक्षकों ने हर वर्ष 10 प्रतिशत मानदेय वृद्धि के वर्षों से लंबित आदेश को शीघ्र लागू करने की मांग की। संघ का कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है, लेकिन शिक्षकों के मानदेय में अपेक्षित वृद्धि नहीं की जा रही है। इसके अलावा मुख्यमंत्री की बजट घोषणा के तहत घोषित 20 प्रतिशत मानदेय वृद्धि अब तक नहीं मिलने पर भी शिक्षकों ने गहरा रोष जताया। संघ ने चेतावनी दी कि यदि इन मांगों को जल्द पूरा नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट आदेश की पालना तक सेवा लाभ देने की मांग संघ ने यह भी मांग रखी कि जब तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पूरी तरह से पालना नहीं हो जाती, तब तक सभी विशेष शिक्षकों को सभी सेवा लाभ तत्काल दिए जाएं। धरने में वक्ताओं ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया में लगने वाले समय का खामियाजा शिक्षकों को नहीं भुगतना चाहिए। बड़ी संख्या में शिक्षक और पदाधिकारी रहे मौजूद धरना प्रदर्शन में संघ के प्रदेश महामंत्री जुगलकिशोर अवस्थी, प्रदेश अध्यक्ष रामखिलाड़ी मीणा, कोषाध्यक्ष नरेश कुमार मीणा, प्रदेश उपाध्यक्ष मंजू शर्मा सहित राजीव, सुधांशु गुप्ता, सोहनलाल, सुनील बैरवा, आशा तवर, मनोज जोशी, शैलेन्द्र तिवारी समेत बड़ी संख्या में विशेष शिक्षक उपस्थित रहे। सभी ने एकजुट होकर सरकार से जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की और चेताया कि मांगें नहीं मानी गईं तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा। निष्कर्ष: शहीद स्मारक पर हुआ यह एकदिवसीय धरना केवल मांगों का प्रदर्शन नहीं, बल्कि विशेष शिक्षकों की वर्षों की पीड़ा और संघर्ष की अभिव्यक्ति था। विशेष शिक्षक न केवल अपने अधिकारों की बात कर रहे हैं, बल्कि उस व्यवस्था को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं, जिस पर विशेष आवश्यकता वाले हजारों बच्चों का भविष्य निर्भर है। अब देखना यह है कि सरकार इस आवाज़ को कितनी गंभीरता से सुनती है और कब तक इन मांगों पर ठोस कदम उठाए जाते हैं।
