Naresh Meena News: हेलीकॉप्टर से कोलाहेड़ा पहुंचे किसान नेता नरेश मीणा, हिंडोली–नैनवां में उमड़ा जनसैलाब, राजनीतिक षड्यंत्रों पर किया बड़ा हमला
बूंदी/नैनवां। हिंडोली–नैनवां विधानसभा क्षेत्र के ग्राम कोलाहेड़ा में आयोजित भगवान देवनारायण के मेले के अवसर पर रविवार को राजनीतिक और सामाजिक माहौल पूरी तरह गरमा गया, जब भगत सिंह सेना के अध्यक्ष एवं किसान नेता नरेश मीणा हेलीकॉप्टर से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। दोपहर करीब 2 बजे जैसे ही हेलीकॉप्टर हेलीपैड पर उतरा, हजारों समर्थकों की मौजूदगी ने पूरे क्षेत्र को जनसमर्थन के सैलाब में बदल दिया।
हेलीपैड से कार्यक्रम स्थल तक नरेश मीणा को कंधों पर बैठाकर ले जाया गया। रास्ते भर जयकारे, नारे और ढोल-नगाड़ों की गूंज सुनाई देती रही। मेला समिति के पदाधिकारियों ने पारंपरिक तरीके से उनका भव्य स्वागत और सम्मान किया। भगवान देवनारायण के जयकारों के बीच विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए नरेश मीणा ने अपने राजनीतिक संघर्ष, किसान एकता और सामाजिक भाईचारे पर खुलकर बात रखी।
“किसान और समाज की एकता ही मेरा झंडा”
अपने संबोधन की शुरुआत में नरेश मीणा ने कहा कि यह पहला अवसर है जब हिंडोली विधानसभा क्षेत्र में उनका हेलीकॉप्टर उतरा है। उन्होंने कहा कि राजनीति को समझने वाले लोग जानते हैं कि अंता विधानसभा उपचुनाव के बाद पूरे राजस्थान की निगाहें आज इस जनसमुदाय पर हैं।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि कुछ ताकतें चाहती थीं कि वे चुनाव हारें और समाज में फूट पड़े, लेकिन उन्होंने हमेशा एक ही झंडा उठाया—किसान और समाज की एकता का। “मैं किसान के घर पैदा हुआ हूं, खेत-खलिहानों में पला हूं। अगर राजनीति में कुछ बन पाया तो वह केवल किसान कौम के लिए समर्पित होगा,” उन्होंने कहा।
किसान एकता से डरती है सियासत
नरेश मीणा ने आरोप लगाया कि जब-जब किसान समाज को एकजुट करने का प्रयास हुआ, तब-तब राजनीतिक षड्यंत्र रचे गए। उन्होंने कहा कि राजस्थान की राजनीति में उन्होंने सचिन पायलट, प्रहलाद गुंजल और हनुमान बेनीवाल के साथ मिलकर किसान हित में काम किया, लेकिन कुछ लोग नहीं चाहते थे कि किसान कौम एकजाजम पर बैठे।
उनका कहना था कि किसान एकजुट होते हैं तो गिनती की वोटों पर टिकी राजनीति बिखर जाती है, इसलिए साजिशें रची जाती हैं।
गुर्जर–मीणा एकता का उदाहरण बना कोलाहेड़ा
नरेश मीणा ने कोलाहेड़ा गांव को सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बताते हुए कहा कि भगवान देवनारायण की पूजा मुख्य रूप से गुर्जर समाज करता है, लेकिन यह पहला उदाहरण है कि जिस गांव में भगवान देवनारायण का मंदिर और मेला है, वहां पूरा गांव मीणा समाज का है।
उन्होंने कहा कि कोलाहेड़ा ने गुर्जर–मीणा एकता और भाईचारे की मिसाल पेश की है, जो आने वाले समय में राजस्थान की राजनीति की दिशा बदल सकती है।
अंता उपचुनाव और तीखे राजनीतिक आरोप
अंता विधानसभा उपचुनाव का जिक्र करते हुए नरेश मीणा ने कहा कि उस समय सर्व समाज, विशेषकर गुर्जर समाज ने उन्हें भरपूर समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि यदि वे विधानसभा में पहुंचते तो शांति धारीवाल की राजनीति का “इलाज” करते, क्योंकि उन्हीं की वजह से सचिन पायलट मुख्यमंत्री नहीं बन पाए।
उन्होंने यह भी कहा कि वे ओम बिरला जैसे नेताओं की राजनीति को चुनौती देने से पीछे नहीं हटते।
हिंडोली विधायक पर बिना नाम लिए हमला
अपने भाषण में नरेश मीणा ने बिना नाम लिए अशोक चांदना पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनके समाज के लोगों ने एक व्यक्ति को तीन बार विधायक बनाया, लेकिन उसी ने सचिन पायलट और प्रहलाद गुंजल को कमजोर करने का काम किया।
“ऐसा व्यक्ति न अपने नेता का हुआ, न अपने समाज का,” कहते हुए उन्होंने इसे जयचंद प्रवृत्ति करार दिया।
“अभिमन्यु की तरह घेरा गया”
नरेश मीणा ने आरोप लगाया कि 2028 के चुनाव अभी दूर हैं, फिर भी उन्हें हराने के लिए कई लोग एकजुट हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि जिस तरह अभिमन्यु को घेरकर मारा गया, उसी तरह उनकी राजनीतिक हत्या का प्रयास हुआ।
उन्होंने आरोप लगाया कि केशोरायपाटन विधायक सीएल प्रेमी, सांगोद विधायक हीरालाल नागर, टीकाराम जूली और गोविंद सिंह डोटासरा ने मिलकर षड्यंत्र किया, क्योंकि ये लोग किसान एकता नहीं देखना चाहते थे।
जेल, मुकदमे और संघर्ष
नरेश मीणा ने कहा कि चुनाव हारने के बाद भी उनके खिलाफ साजिशें जारी रहीं। उन पर जानलेवा हमला हुआ, लेकिन उल्टा उन्हें ही आरोपी बनाकर धारा 307 का मामला दर्ज किया गया।
उन्होंने बताया कि सामान्य मामलों में जहां तीन दिन में जमानत हो जाती है, वहीं उन्हें समरावता कांड के बाद आठ महीने तक जेल में रखा गया। उन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे जेल से डरने वाले नहीं हैं।
“भगत सिंह की सेना देगी जवाब”
अपने संबोधन के अंत में नरेश मीणा ने कहा कि भगत सिंह की सेना घर-घर और सड़क-सड़क जाकर जनविरोधी राजनीति का जवाब देगी। उन्होंने हिंडोली क्षेत्र में किसी मजबूत स्थानीय चेहरे को आगे बढ़ाने की बात कही और जनता से आने वाले चुनाव में जवाब देने की अपील की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वे साधारण किसान परिवार से हैं, उन्होंने कभी अनैतिक तरीके से धन नहीं कमाया। चंदा लेने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि जनता के सहयोग से ही वे संघर्ष करते आए हैं और आगे भी करेंगे, लेकिन ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे जिससे समाज को शर्मिंदा होना पड़े।
भाईचारे की अपील
अंत में भगवान देवनारायण के चरणों में शीश नवाकर नरेश मीणा ने समाज में भाईचारा बनाए रखने, व्यक्तिगत प्रतिक्रिया से बचने और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने की अपील की।
कार्यक्रम में डॉ. रामसागर नागर, नरेश नागर, सरपंच मुकेश मीणा (बरनी), आरडी गुर्जर, घासीलाल गुर्जर, दुर्गालाल गुर्जर सहित हिंडोली–नैनवां विधानसभा क्षेत्र के हजारों लोग उपस्थित रहे।
निष्कर्ष:
कोलाहेड़ा का यह आयोजन केवल धार्मिक मेला नहीं, बल्कि किसान एकता, सामाजिक समरसता और आगामी राजनीतिक संकेतों का बड़ा मंच बनकर उभरा। नरेश मीणा के भाषण ने साफ कर दिया कि आने वाले समय में हिंडोली–नैनवां की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
