रविंद्र कौशिक वो नाम जो बेनामी में गुम हो गया, जिंदगी कुर्बान हुई देश के नाम न मिला कोई भी सम्मान ?

भारत का एक ऐसा जासूस जो नाम बदलकर, पहचान बदलकर पाकिस्तान में रहा। पाकिस्तान आर्मी में शामिल हुआ। मेजर रैंक तक पहुंचा। वहीं पर प्यार में पड़ा, शादी भी की लेकिन भारत के ही भेजे एक दूसरे जासूस की वजह से पकड़ा गया। आखिरकार सालों तक रोंगटे खड़े कर देने वाली यातनाओं के बाद पाकिस्तान की ही एक जेल में आखिरी सांस ली। कहानी भारत के उस महान जासूस रविंद्र कौशिक की जिन्हें भारतीय खुफिया गलियारों में ‘द ब्लैक टाइगर’ के नाम से जाना जाता था।   महान जासूस किसी दूसरे देश में जाकर जासूसी कोई ऐसी बात नहीं जो चौंका सके। लेकिन जासूसी के लिए किसी दूसरे देश की सेना में शामिल हो जाना वाकई दंग करने वाला है। रविंद्र कौशिक ने इसे मुमकिन बनाया था जो अपने आप में इस बात का गवाह है कि वह किस आलातरीन दर्जे के जासूस थे। दो दशक पहले आई मलय कृष्ण धर की किताब ‘Mission to Pakistan : An Intelligence Agent in Pakistan’ इसी ‘ब्लैक टाइगर’ पर आधारित है। सलमान खान की 2012 में आई फिल्म ‘एक था टाइगर’ रविंद्र कौशिक से ही प्रेरित थी। चर्चा तो यह भी है कि अब फिल्ममेकर राजकुमार कुमार गुप्ता कौशिक की बायोपिक बनाने जा रहे हैं जिसमें उनकी भूमिका में एक बार फिर सलमान खान दिखेंगे।   यातनाएं सहते गए मगर जुबां नहीं खोली रविंद्र कौशिक की जिंदगी के आखिरी 18 साल पाकिस्तान की अलग-अलग जेलों में भीषण यातनाओं में गुजरे। रोंगटे खड़े कर देने टॉर्चर को सहते रहे लेकिन दिल में दफन राज़ को राज़ ही रहने दिया। वे राज़ जो खुल जाते तो भारतीय खुफिया नेटवर्क को बहुत धक्का लगता, भारत को बड़ा झटका लगता।

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